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पढ़ें मुजफ्फरनगर में दंगे की पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट

By Ajay Mohan
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मुजफ्फरनगर। उत्‍तर प्रदेश के जाटलैंड के सबसे महत्‍वपूर्ण औद्योगिक शहर मुजफ्फरनगर में दंगों की आग फैली तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने विरोधी दलों पर दोष मढ़ दिया और कहा कि विरोधी पार्टियों ने दंगे की आग को भड़काया। समाजशास्‍त्री सीएम के बयान को महज बचकाना ही मान रहे हैं, क्‍योंकि सपा के मुख्‍य विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी हैं और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में दोनों का ही सिक्‍का नहीं चलता है। एक समाजशास्‍त्री की निगाह से अगर इन दंगों का पोस्‍टमॉर्टम करने पर पाया कि इन सबकी नींव तो खुद समाजवादी पार्टी ने तैयार की है।

आगे चर्चा से पहले हम आपको पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश की संरचना के बारे में बताना चा‍हेंगे, जहां पर किसानों का राज है। मुस्लिमों की जनसंख्‍या इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन हिन्‍दू समृद्ध हुए हैं, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है। पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के इस इलाके को जाटलैंड कहते हैं। दुर्भाग्‍यवश यहां पर हिन्‍दू-मुस्लिम के बीच उतना समन्‍वय नहीं है, जितना की लखनऊ में देखने को मिलता है। हिन्‍दू ज्‍यादातर जाट समुदाय से हैं, जिनमें अधिकांश कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वहीं मुस्लिम परिवारों के लोग फैक्ट्रियों में काम करने में ज्‍यादा रुचि रखते हैं।

इनके बीच नफरत की दीवार कब तैयार हुई, यह सवाल जितना जटिल है। उसका उत्‍तर उतना ही सरल है- राजनीतिक ध्रुवीकरण। कानपुर के क्राइस्‍टचर्च कॉलेज के समाजशास्‍त्री डा. एके वर्मा कहते हैं कि राजनीतिक ध्रुवीकरण ही नफरत की आग का सबसे बड़ा कारण है। अगर 1987 में पर्वू मुख्‍यमंत्री चौधरी चरण सिंह के निधन के पहले के पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को देखें, तो सांप्रदायिक दंगे न के बराबर होते थे, लेकिन आज स्थिति बेहद खराब है। चरण सिंह को आज भी जाटों के सबसे बड़े नेता के रूप में देखा जाता है। खास बात यह है कि जबतक वे राजनीति में सक्रिय रहे, तब तक उन्‍होंने मुस्लिमों को अपने से अलग नहीं किया।

चरण सिंह के निधन के बाद उनके बेटे अजित सिंह ने राष्‍ट्रीय लोक दल को सिर्फ किसानों की पार्टी बनाकर रख दिया। वो भी हिन्‍दू जाट किसानों की। इसी बात का सबसे बड़ा फायदा उठाया मुलायम सिंह यादव ने और मुस्लिमों का खेवनहार बनकर सपा की जड़ों को पश्चिम में मजबूत कर दिया। जैसे-जैसे सपा की जड़ें मजबूत हुईं वैसे-वैसे क्षेत्र में लोगों के बीच ध्रुवीकरण होने लगा। 2007 के चुनाव में जाट समुदाय के लोगों में से 48.6 फीसदी वोट रालोद को दिये, जबकि सपा को 10.9 फीसदी वोट मिले। वहीं 2012 में 44 फीसदी रालोद को और 6.8 फीसदी सपा को मिले। इन्‍हें टक्‍कर दी मुस्लिम वोटों ने और 2007 में सपा के हक में 46.4 फीसदी वोट गिरे, जब‍कि 2012 में 39.4 फीसदी वोट मिले।

बात अगर मुस्लिम जनसंख्‍या की करें तो पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश (सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, जीबी नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, बिजनौर, जेपी नगर, मुरादाबाद और रामपुर) में कुल जनसंख्‍या के 33.2 फीसदी मुसलमान हैं। लिहाजा अगर वोटबैंक की राजनीति के लिये सामाजिक ध्रुवीकरण जारी रहा, तो मुजफ्फरनगर दंगों जैसे कई अन्‍य दंगे भविष्‍य में भी देखने को मिलेंगे। मुजफ्फरनगर दंगों में अबतक क्‍या हुआ देखें स्‍लाइडर में।

मृतकों की तादाद 38 हुई

मृतकों की तादाद 38 हुई

जिले में सोमवार देर रात हुई हिंसा में आठ और लोगों के मारे जाने के बाद यहां मृतकों की संख्या 38 हो गई है। इस बीच शहरी इलाके में स्थिति नियंत्रण में है लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति सुधारने के लिए सेना के जवानों और पुलिस अधिकारियों को भी मशक्कत करनी पड़ रही है।

अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा

अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा

जिला प्रशासन के मुताबिक देर रात ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई। हिंसा में अब तक 48 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।

तीन लोग अन्‍य जिलों में मारे गये

तीन लोग अन्‍य जिलों में मारे गये

बागपत, शामली और मेरठ में हुई अलग-अलग हिंसा में तीन लोगों के मारे जाने की सूचना है लेकिन प्रशासन की तरफ से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अब तक 286 गिरफ्तार

अब तक 286 गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर हिंसा के मामले में अब तक 286 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है और 46 लोगों के खिलाफ नामजदगी दर्ज कराई गई है।

गोलीबारी की घटनाएं

गोलीबारी की घटनाएं

इस बीच, जिला प्रशासन और सेना की टुकड़ियों के तैनात किए जाने के बाद भी कई जगहों पर लगतार गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने उपद्रवियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं।

सेना की मदद ली

सेना की मदद ली

शीर्ष अधिकारियों के मुताबिक हिंसा जिले के ग्रामीण इलाकों तक फैल चुकी है और इसीलिए सेना की मदद ली गई है। ग्रामीण इलाकों में सेना के जवानों को पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन हालात नियंत्रण में हैं। जिले के सिसौली, शाहपुर, बानिग, कालापार और बारातालाब में हिंसा फैली है।

तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू

तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू

जिले के तीन थाना क्षेत्रों सिविल लाइन, कोतवाली और नई मंडी में कर्फ्यू लगाया गया है।

महापंचायत बुलाई गई थी

महापंचायत बुलाई गई थी

लगभग एक सप्ताह पूर्व छेड़छाड़ की एक घटना के बाद भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसी घटना को लेकर शनिवार को महापंचायत बुलाई गई थी। महापंचायत से लौट रहे लोगों पर शरारती तत्वों द्वारा पथराव किए जाने के बाद जिले में हिंसा भड़क उठी। हिंसा जिले के शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैली थी।

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English summary
Curfew has been imposed after communal clashes in Muzaffarnagar district of Uttar Pradesh. CM Akhilesh Yadav is pointing finger towards rival parties. But the postmortem report of riots says that base of communal differences have been created by Samajwadi Party itself.
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