फूड सिक्योरिटी बिल नहीं साबित होगा 'वोट सिक्योरिटी बिल'
[ईश्वर आशीष] देश की संप्रग सरकार ने सत्ता में वापसी के लिए खाद्य सुरक्षा बिल का कार्ड खेला है, जिसके बारे में कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह बिल उनके कुशासन, भ्रष्टाचार और नाकामी को ढक लेगा पर क्या ऐसा वास्तव में कुछ हो पाएगा, इसकी संभावना कम ही नज़र आती है क्योंकि पिछले कुछ समय में सरकार जिस तरह से देश की समस्याओं को लेकर असहाय नजर आयी है उसमें यह बिल भी आम जनता में सरकार के प्रति विश्वास उत्पन्न करेगा ये कहना मुश्किल है। सबसे पहले बात करेंगे संप्रग के पिछले कार्यकाल में लागू की गई योजना मनरेगा की। यह योजना बड़े जोर शोर से लागू की गई थी लेकिन कुछ समय बाद भ्रष्टाचार के कारण इस योजना को लेकर सरकार ही सवालों के घेरे में आ गयी।
ऐसे में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या मनरेगा की तरह यह योजना सरकार के लिए सत्ता में आने की बैशाखी साबित होगी? सरकार के सामने भ्रष्टाचार के रूप में अब भी संकट है और इससे निजात पाने के लिए योजना में किसी विशेष मॉनीटरी बॉडी की नियुक्ति नहीं की गई है, ऐसे में इसमें भ्रष्टाचार नहीं होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके अलावा जनता को महंगाई का भी सामना करना पड़ रहा है, वहीं सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध करवाने पर सरकार पर जो आर्थिक बोझ पड़ेगा उसका भी निपटारा अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ाकर ही किया जाएगा, ऐसे में महंगाई और बढ़ेगी। मतलब साफ है कि सरकार एक हाथ से देगी तो दूसरे हाथ से लेगी।

संप्रग सरकार ने बिना देर लगाये इस योजना को दिल्ली, राजस्थान, अरूणाचल प्रदेश और हरियाणा में लागू भी कर दिया। जिसका लाभ चार राज्यों के गरीबों को मिलेगा। अभी हाल ही आये योजना आयोग के आंकड़ों के अनुसार देश में 21.9 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजार रहे हैं, इनमे से भी इस योजना के लाभान्वितों में इन चार राज्यों के लोग ही होंगे और ये संप्रग को सत्ता में वापसी के लिए कितनी सहायता कर पायेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल वर्तमान हालातों को देखकर इसे यूपीए के लिए आगामी चुनावों में 'गेमचेंजर' नहीं माना जा सकता है।
सिर्फ गरीबी और भ्रष्टाचार ही नहीं देश इस समय आंतरिक और बाह्य दोनों ही मोर्चे पर संघर्ष कर रहा है अत: ये कहना कि यह योजना सरकार की गल्तियों, नाकामियों को ढक लेगी, बेहद मुश्किल है।












Click it and Unblock the Notifications