राजीव गांधी की तरह कैसे बन सकते हैं राहुल गांधी

बैंगलोर। भारतीय राजनीति में विवादों के बावजूद एक दूरदर्शी और प्रेरणादायक लीडर के तौर पर जाने जाने वाले राजीव गांधी का आज जन्‍मदिन है, जिसे देश में सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाता है। राजीव को देश में सूचना क्रांति का जनक कहा जाता है। हालांकि जब उन्‍होने इसकी शुरूआत की तब बड़े पैमाने पर उनका विरोध हुआ था लेकिन आज विश्‍व की शीर्ष कंपनियों में भारत के लोग काम कर रहे हैं और कई शीर्ष भारतीय कंपनियां विश्‍व स्‍तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।

राजनीति में खास रुचि न लेने वाले राजीव को ऐसे समय में इस क्षेत्र में कदम रखना पड़ा जब उनके भाई संजय की हवाई दुर्घटना में असामयिक मृत्‍यु हो गयी थी। इसके अलावा 1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद उन्‍होने चुनाव में उतरकर एक बड़ी जीत हासिल की और प्रधानमंत्री पद संभाला। उस समय भी देश आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा था और आज भी देश फिर से आर्थिक संकटों से घिरा हुआ है। ऐसे में कांग्रेस के पास उम्‍मीद की एक लौ राहुल गांधी के रूप में हैं। हालांकि इतने समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद राहुल न तो कोई खास फर्क पैदा कर पाये हैं और न ही एक नेता के तौर पर अपने पिता की तरह विश्‍वसनीय ही साबित हो सके हैं।

कांग्रेस ने पिछले दिनों जयपुर में हुए सम्‍मेलन में राहुल गांधी को पार्टी का महासचिव घोषित कर उन्‍हें बड़ी भूमिका में लाने के संकेत दिये थे लेकिन घोटालों और भ्रष्‍टाचार के आरोपों का सामना कर रही यूपीए बचाव की मुद्रा में ही दिखी। पिछले दो वर्षों में ऐसे भी मौके आये, एक तो जब अन्‍ना हजारे ने जनलोकपाल बिल के लिए आंदोलन किया और दूसरी बार दिल्‍ली रेप केस के बाद जनता सड़कों पर आ गयी। इन मौकों पर राहुल आगे आकर देश की जनता का भरोसा जीत सकते थे लेकिन वह परिदृश्‍य से ही गायब हो गये।

हालांकि राहुल देश की जनता से संपर्क स्‍थापित करने के लिए गरीबों के घर गये और उनकी तरफदारी भी की लेकिन वह जनता का विश्‍वास न जीत सकें। हम इस लेख में चर्चा करेंगे कि राहुल गांधी कैसे अपने पिता राजीव की तरह बन सकते हैं?

युवाओं में लोकप्रिय

युवाओं में लोकप्रिय

युवाओं के चहेते थे, राजीव गांधी, 18 साल की उम्र में वोट देने और आईटी क्रांति भी उन्‍हीं की देन है। राजीव ईमानदार और युवा शक्ति को परिभाषित करते थे, राहुल न एक चतुर राजनीतिज्ञ बन पाये, न ईमानदार छवि बना पाये। गरीबों के घर में खाना खाकर राहुल ने भी इंदिरा गांधी की राहों को चुना, लेकिन राजीव की तरह उन्‍हीं गरीबों को कभी पलट कर दोबारा नहीं देखा।

ऐसे में राहुल गांधी को चाहिए कि वह फ्रंटफुट पर आकर चुनौतियों का सामना करें और देश के हालात को समझकर कड़े फैसलें करें जिससे कि देश के युवाओं को उनमें एक नेतृत्‍व की क्षमता दिखे। पार्टी के मुश्किल में होने के बावजूद कांग्रेस का युवा वर्ग आज भी उन्‍हें प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वथा उपयुक्‍त मान रहा है।

भाषण शैली

भाषण शैली

राजीव गांधी अपनी खास भाषण शैली के कारण युवाओं के साथ ही पूरे देश की जनता का ध्‍यान आकर्षित करते थे। उस समय संचार के साधन न होने के बावजूद उन्‍हें सुनने के लिए लोग उत्‍सुक रहते थे। वहीं राहुल गांधी के भाषण जनता में कोई उम्‍मीद नहीं पैदा करते हैं। कई बार तो उनके भाषणों में अपरिपक्‍वता भी दिखाई देती है। राहुल को चाहिए कि वह जनता के बीच जाकर काम करें और अर्जित अनुभव के आधार पर जनता से संपर्क स्‍थापित करें।

सांत्‍वना वोट

सांत्‍वना वोट

इंदिरा गांधी की मृत्‍यु के बाद राजीव को सांत्‍वना वोट मिला और उन्‍होने भारी बहुमत से जीत हासिल की। वहीं राहुल गांधी ने भी एक बार अपने भाषण में कहा था कि उन्‍होने भी आतंकवाद के कारण अपनी दादी और पिता को खो दिया, अत: वह भी देश की जनता का आतंकवाद का दर्द समझते हैं।

लिहाजा आतंक के मसले पर जनता उन्‍हें माफ कर सकती है लेकिन देश की खस्‍ता आर्थिक नीतियों में सुधार के लिए राहुल को देश के सामने एक मॉडल रखना होगा और कड़ाई से इसका पालन करना होगा, जिससे कि वह जनता में एक विश्‍वसनीय छवि बना सकें।

बयानबाजी

बयानबाजी

राजीव गांधी ने इंदिरागांधी की मृत्‍यु पर सिक्‍खों के कत्‍लेआम पर कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। वहीं राहुल ने भी कई बार विव‍ादित बयान दिये। भट्टा परसौल आंदोलन के बारे में राहुल ने कहा था कि वहां कई किसानों को जिंदा जला दिया गया लेकिन सच में ऐसा नहीं हुआ था। उनके बयान पर कांग्रेस की बड़ी निंदा हुई थी। अत: राहुल को अब सोंच समझकर ही बयान देना होगा।

आतंकवाद

आतंकवाद

राहुल और राजीव में समानता यही है कि दोनों ने ही आतंकवाद का सामना किया है। जहां राजीव ने आतंकवाद के कारण अपनी मां को खो दिया। वहीं राहुल ने पिता राजीव को ही।

इसके अलावा देश में अब तक कई आतंकी हमले हो चुके हैं ऐसे में राहुल गांधी आतंकवाद के खिलाफ कोई रणनीति तैयार कर, देश की इस समय से निपटने में मदद कर सकते हैं क्‍योंकि विपरीत हालातों में भी कांग्रेस को चुनाव में वोट मिल सकते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+