उत्तर प्रदेश में नदियां उफान पर, सैंकड़ों गांव डूबे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्वाचल से लेकर राज्य के पश्चिमी हिस्से तक विभिन्न अंचलों में सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से शासन और प्रशासन के लिए मुसीबतें खड़ी हो रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।
बुंदेलखंड, पूर्वाचल और मध्य उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हमीरपुर में यमुना और बेतवा का पानी कई गावों में प्रवेश कर गया है। चित्रकूट में यमुना नदी के उफान पर होने से कई गांवों में दहशत का माहौल है। लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित जगहों की तरफ पलायन कर रहे हैं।
फरु खाबाद में एक तरफ जहां 90 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, वहीं कन्नौज में गंगा का पानी कई गावों में घुस चुका है। हरदोई में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे रह गया है। फतेहपुर के कई गांव यमुना की बाढ़ में डूब गए हैं। इलाहाबाद में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में बसे लोग दहशत के साए में जी रहे हैं।
पूर्वाचल में बाढ़ की वजह से लोगों का और भी बुरा हाल है। मिर्जापुर से चंदौली तक कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गाजीपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। गाजीपुर में सेमरा गांव की स्थिति काफी बुरी है। लगभग आधा गांव गंगा में समाहित हो गया है। प्रशासन की तरफ से कोई मदद न मिलने की वजह से गांव के लोगों के भीतर रोष व्याप्त है। कटान से प्रभावित और अपने घर गवां चुके लोग तम्बुओं में जीवन गुजारने के लिए मजबूर हो गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक जिस गति से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे यही लगता है कि अगले 24 घंटों के दौरान वाराणसी और मिर्जापुर में भी गंगा खतरे के निशान को पार कर जाएगी। उत्तर प्रदेश बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ ने कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। शासन स्तर से भी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश जारी कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्रभावितों के लिए राहत सामग्री का वितरण भी कराया जा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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