चिदंबरम ने नाराजगी के बाद सुब्बाराव का जाना तय, नए गवर्नर की तलाश शुरु
नयी दिल्ली। आरबीआई के मौजूदा गवर्नर सुब्बा राव का जाना लगभग तय माना जा रहा है। दरअसल वित्त मंत्री पी चिदंबरम और सुब्बा राव की वर्किंग स्टाइल मैच नहीं खा रही है। सुब्बा राव की मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर चिदंबरम नाराज है। उनका नाराजगी की खबरें आ रही हैं। वहीं नाराज चिदंबरम ने साफ कर दिया है कि आरबीआई के नए गवर्नर की तलाश जारी है।
एक ओर जहां सरकार ने आरबीआई के गवर्नर से अपनी नाराजगी जाहिर ही है तो वहं सुब्बा राव ने खुद ही पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है। हालांकि पिछले दिनों जब सुब्बा राव दिल्ली आए थे तो उन्होंने कहा था कि उन्हें अभी तक यह पता नही है कि उन्हें इस पद पर रहना है या जाना है। 4 सितंबर को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

अगर सुब्बा राव पद छोड़ते है तो सबसे बड़ा सवाल ये कि अगल गवर्नर कौन होगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस बार आरबीआई के डेप्युटी गनर्वर को अगला गवर्नर बनाने की परंपरा को चिदंबरम तोड़ने जा रहे है। आरबीआई के अगले गवर्नर बनने की रेस में सबसे पहला नाम वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन का लिया जा रहा है। राजन को स्वयं चिदंबरम ने प्रमुख आर्थिक सलाहकार बनाया था। इस सूची में अगला नाम योजना आयोग के सदस्या सौमित्र चौधरी और आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम का है। इनमें रघुराम राजन और चौधरी, दोनों ही चिदंबरम के करीबी माने जाते हैं।
जहां पी चिदंबरम नए आरबीआई के गवर्नर की तलास में जुटे है तो वहीं सुब्बा राव से नाराजगी वजहों के कयासों का बाजार भी गर्म है। सूत्रों की माने तो सुब्बा राव ने कई बार सरकार की बातों को यह कहते दरकिनार कर दिया है कि महंगाई को रोकना ही केंद्रीय बैंक की प्रमुखता है।
दरअसल सरकार चाहती थी कि इस चुनावी साल में किसी तरह से ब्याज दरों में कमी की गुंजाइश निकाली जाए। पर सुब्बा राव ने हालात को देखते हुए रिस्की कहते हुए इसे दरकिनार किया। इसके अलावा भी कई प्रमुख वजहें है जिसकी वजह से सुब्बाराव और सरकार में अनबन चलती रही है।












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