अखिलेश जी याद रखियेगा IAS दुर्गा शक्ति को, ये है कल की किरण बेदी
[अजय मोहन] उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोएडा में तैनात आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित कर दिया। आईएएस अधिकारी नाराज हैं, आम जनता सोच में पड़ गई है, विरोधी दल सीएम को कोस रहे हैं। सबसे ज्यादा खास तो यह है कि दुर्गा की शक्ति छीनते वक्त अखिलेश यादव वक्त फिल्म का डॉयलॉग 'जिनके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते....' भूल गये। आगे लिखने से पहले हम आपको बता दें कि इस समय अखिलेश यादव का खुद का किला शीशे का है और जिस दुर्गा पर उन्होंने पत्थर फेंका है, वो है कल की किरण बेदी।
अपनी बात को विस्तार देते हुए हम सबसे पहले बात करेंगे शीशे के किले की। जी हां अखिलेश के किले में ओहदे में सबसे ऊपर यानी मुख्य सचिव नियुक्ति राजीव कुमार हैं। अखिलेश की नज़र दुर्गा शक्ति पर चली गई, लेकिन बगल में बैठे राजीव कुमार पर नहीं गई, जिन्हें नोएडा की ही जिला अदालत ने सजा सुनायी थी। मामला ऊपरी अदालत में है। अखिलेश को आईएएस संजीव शर पर लगे दाग नहीं दिखे, जिन पर कमर्शिल जमीन को औद्योगिक दमों पर एक होटल व्यवसायी को अलॉट करने के आरोप लगे हुए हैं। मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।

दुर्गा की शक्ति छीनने के क्या हो सकते हैं परिणाम
आईएएस दुर्गा शक्ति को निलंबित करने के दो परिणाम हो सकते हैं। पहला यह कि महिला आईएएस का वो जुनून खत्म हो जायेगा, जो उन्होंने रात-दिन पढ़ाई कर देश सेवा के लिये पैदा किया। आगे चलकर वो भी सिस्टम में ढल जायेंगी, जैसे तमाम आईएएस अधिकारी करते हैं। यदि ऐसा हुआ तो आज भू-माफिया हैं, न जाने कल कितने माफिया पैदा होंगे और उन्हें सत्ताधारियों का भरपूर संरक्षण मिलता जायेगा। भ्रष्टचार का दलदल और गहरा होता जायेगा और जिस उत्तर प्रदेश को अखिलेश यादव उत्तम प्रदेश बनाना चाहते हैं, वह बुरी तरह पिछड़ जायेगा।
दूसरा परिणाम यह हो सकता है कि दुर्गा शक्ति आगे चलकर किरण बेदी की तरह निडर, निर्भीक अधिकारी बनकर उभरें। जी हां 1982 में ऐसा ही कुछ किरण बेदी के साथ हुआ था। भारत की पहली आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को एशियाड खेलों के दौरान दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था सौंपी गई थी। उसी दौरान स्टेडियम का मुआयना करने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यालय से तमाम वीवीआईपी लोग स्टेडियम पहुंचे और अपने वाहन नो-पार्किंग जोन में खड़े कर दिये। किरण बेदी ने वो वाहन क्रेन से उठवाकर थाने पहुंचवा दिये। जिस पर उन्हें नोटिस मिला और ऊपर से कड़ी फटकार भी।
नेताओं की कड़ी फटकार किरण बेदी के हौंसलों को हिला नहीं सकीं और वो अपने बनाये हुए रास्तों पर निर्भीक होकर चलती चली गईं। किरण बेदी का कहना है कि वोट की राजनीति आईएएस-आईपीएस को मोहरा बनाने के चक्कर में रहती है, यह आईएएस-पीसीएस को तय करना होता है कि वो मोहरा बनें या अधिकारी। हम आईएएस दुर्गा से भी उम्मीद करते हैं कि वो मोहरा नहीं बनेंगी और इस निलंबन का जवाब निर्भीकता के साथ देंगी।
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