छात्रों के बीच पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देंगे अखिलेश के मुफ्त लैपटॉप!
[अजय मोहन] भारत में जब पहली बार चाय आयी, तो अंग्रेजों ने मुफ्त में बांटीं। यहां तक कई शहरों में एक प्याला चाय के साथ 10 पैसे भी मिलते थे। वह ऐसा लालच था, जिसके चक्कर में आकर आज पूरे भारत को चाय की ऐसी लत लगी है, जिसे छुड़ाना अब मुमकिन नहीं। जबकि सच पूछिए तो चाय में पाये जाने वाले लेड की वजह से फेंफड़ों व लीवर संबंधित घातक बीमारियां हो सकती हैं। ठीक वैसा ही हाल कुछ मुफ्त लैपटॉप का होने वाला है, जो अखिलेश यादव की सपा सरकार उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं को बांट रही है। अगर अभी सजग नहीं हुए, तो आगे चलकर यही फ्री लैपटॉप युवाओं में यौन अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अभी तक बीए, बीएससी या बीकॉम में ऐसे प्रोजेक्ट बनाने का चलन नहीं शुरू हुआ है, जिसमें कंप्यूटर की जरूरत पड़ती हो, दूसरी बात 80 फीसदी छात्र जो नियमित रूप से कक्षा में नहीं आते, वो क्या करेंगे इस लैपटॉप का। अटेंडेंस फुल कर भी दी जाये, तो क्या बीए, बीएससी, बीकॉम में के कोर्स में परिवर्तन करेंगे, जिसके अंतर्गत हाई लेवल प्रोजेक्ट बनाने हों? अगर नहीं, तो ये लैपटॉप बीए-बीएससी में किस काम के?
ऐसे में जिस चीज की सबसे प्रबल आशंका दिखाई दे रही है वो है पोर्नोग्राफी। जब छात्र के पास लैपटॉप का कोई काम ही नहीं होगा, तो वह इसे मजे लेने के लिये इस्तेमाल करेंगे। पोर्नोग्राफी देखना और मूवी डाउनलोड करना छात्र के लिये कितना आसान होगा इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि आज आसानी से 30 रुपए का सिमकार्ड और 99 रुपए का इंटरनेट पैक बाजार में उपलब्ध हैं। सवाल यह उठता है कि क्या फ्री के इस लैपटॉप में ऐसा कोई सॉफ्टवेयर है, जो पोर्नोग्राफी को ब्लॉक कर सके? तो उत्तर भी हम यहीं दे दे रहे हैं नहीं! साथ ही इससे जुड़े 10 अन्य सवाल स्लाइडर में उठा रहे हैं।
यह समस्या सिर्फ यूपी की नहीं है, बल्कि तमिलनाडु, राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों की भी है, जहां सरकारें मुफ्त में लैपटॉप वितरण कर रही हैं।

लैपटॉप की स्पेलिंग तक नहीं पता
उत्तर प्रदेश की राजधानी के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज में, जिन छात्रों को लैपटॉप दिये गये हैं, उनसे जब लैपटॉप की स्पेलिंग पूछी गई, तो तमाम छात्र ऐसे निकले जिन्हें लैपटॉप व कंप्यूटर की स्पेलिंग तक नहीं पता।
सवाल- जिन्हें लैपटॉप की स्पेलिंग तक नहीं आती वो इस यंत्र का क्या करेंगे?

टीवी की तरह सज जायेगा
बहराइच, जैतीपुर, श्रावस्ती, आदि जैसे छोटे-छोटे जिलों में अखिलेश के दिये हुए लैपटॉप छात्रों के घरों में ठीक उसी तरह सज जायेंगे, जैसे टीवी और कूलर सजे हुए हैं।
सवाल- जब बिजली ही नहीं, तो लैपटॉप काम कैसे करेगा। लड़के तो फिर भी पड़ोस के होटल में जाकर चार्ज कर लेंगे, लेकिन लड़कियां अपना लैपटॉप कहां चार्ज करेंगी?

माउस जानते ही नहीं
केकेसी, लखनऊ के शिक्षक डा. आलोक चांटिया ने लैपटॉप लेने आये छात्रों से पूछा कि माउस क्या होता है, तो 10 में से 6 बच्चे तो माउस जानते ही नहीं थे।
सवाल- अखिलेश जी आपने लैपटॉप तो दे दिये, क्या डिग्री कॉलेजों में सरकारी खर्च पर कोई ऐसा प्रशिक्षण देने की योजना बनायी, जिसमें छात्रों को कंप्यूटर सिखाया जा सके?

क्या वाकई में पढ़ने के लिये है लैपटॉप
जिन छात्रों को आपने लैपटॉप दिया है, उनमें से 90 फीसदी छात्र तो ऐसे हैं, जो कक्षा तक करने नहीं आते। अगर लखनऊ विश्वविद्यालय व सभी संबद्ध महाविद्यालयों में परीक्षा में बैठने के लिये 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाये, तो 90 फीसदी छात्र तो इम्तहान तक नहीं दे पायेंगे।
सवाल- सीएम साहब यह लैपटॉप क्या वाकई में पढ़ने के लिये दिया गया है? अगर हां, तो आज ही पूरे राज्य में 75 प्रतिशत अटेंडेंस को अनिवार्य कीजिये।

फ्रॉड करना सिखाया
सच पूछिए तो फ्री के इस लैपटॉप ने छात्रों को बारहवीं पासं करते ही फ्रॉड करना सिखा दिया। ऐसे कई मामले संज्ञान में भी आये हैं, जहां छात्रों ने फर्जी दस्तावेज लगाकर लैपटॉप लेने के प्रयास किये और पकड़े गये।
सवाल- ऐसे फ्रॉड आप कैसे रोकेंगे?

फर्जी हस्ताक्षर करना सिखाया
डिग्री कॉलेजों में लैपटॉप प्राप्त करने के लिये छात्र को अपने दसवीं, बारहवीं के सर्टिफिकेट, फीस रसीद और आईडी कार्ड की फोटोकॉपी लगानी होती है। आईडी कार्ड पर प्रॉक्टर के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। जो छात्र कॉलेज ही नहीं आते, उनके आईडी कार्ड पर प्रॉक्टर के हस्ताक्षर कैसे होंगे। तो ऐसे छात्र प्रॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर बनाते पकड़े गये।
सवाल- आज फर्जी हस्ताक्षर किये, कल यह छात्र क्या करेगा?

गरीब छात्रों को लैपटॉप नहीं पैसा चाहिये पढ़ने के लिये
अखिलेश सरकार ने अपना वादा पूरा करने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि उसे पूरा करने के चक्कर में उन छात्रों को भूल गई, जो वाकई में जरूरतमंद थे। जिन्हें पढ़ाई के लिये वाकई में पैसे की जरूरत थी। जी हां इस साल अभी तक स्कॉलरशिप का पैसा सरकार ने विश्वविद्यालों को नहीं भेजा है। यदि सत्र के अंत तक स्कॉलरशिप का पैसा विश्वविद्यालय नहीं पहुंचा तो गरीब छात्रों को या तो इम्तहान में बैठने नहीं दिया जायेगा, या फिर मार्कशीट रोक ली जायेगी।
सवाल- सीएम साहब आपको नहीं लगता कि लैपटॉप से कहीं ज्यादा जरूरी स्कॉलरशिप थी?

टीचर पढ़ाये या लैपटॉप बांटे
सरकारी नियम के अनुसार अगर टीचर दो दिन नहीं पढ़ाता है, तो उसे प्रिंसिपल को जवाब देना पड़ता है। ठीक से कक्षाएं नहीं चलने पर उच्च शिक्षा विभाग से नोटिस आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्या किया जाये, जहां सरकार खुद शिक्षकों से कह रही है कि आप पढ़ाने के बजाये लैपटॉप बांटिये। एक कॉलेज में लैपटॉप बांटने में एक शिक्षक के 10 दिन खराब होते हैं।
सवाल- जिस राज्य में साल के 180 दिन पढ़ाई न होती हो, क्या वहां इस तरह समय की बर्बादी सही है?

बंद हो जायेंगी लाइब्रेरी
डिग्री कॉलेजों की लाइब्रेरी में किताबें इश्यू कराकर पढ़ने का चलन बहुत पुराना है। लेकिन अफसोस आज छात्र अच्छी किताबों व उनके राइटर तक के नाम नहीं जानते। ऐसे में लैपटॉप उनकी यह जरूरत तो पूरी कर देगा। ऐसे में क्या होगा उन पुस्तकालयों का, जहां वाकई में ज्ञान का सही भंडार है।
सवाल- लाइब्रेरी के सही इस्तेमाल के लिये क्या आपके पास कोई योजना है?

आखिर क्या है मकसद
लैपटॉप को लेकर हमारा सबसे बड़ा सवाल अखिलेश सरकार से यह है कि आखिर लैपटॉप बांटकर वो क्या करना चाहते हैं। उनकी सरकार का मकसद क्या है, क्योंकि सिर्फ लैपटॉप दे देने भर से कुछ नहीं होने वाला। बात अगर भविष्य की करें, तो क्या सपा सरकार ऐसे बंदोबस्त करने की योजना बना रही है, जिससे यूपी के छात्रों को खुद के राज्य में ही अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दे?












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