कैबिनेट विस्तार: अब जाकर असली सीएम बने अखिलेश यादव
लखनऊ (नवीन निगम)। जिसकी संभावना थी वहीं हुआ। मंत्रीमंडल विस्तार में अखिलेश की पूरी तरह चली। पहले जो खबरें आ रही थी उनसे पता चल रहा था कि यादव परिवार लिस्ट तय कर रहा है और राजा भैय्या, शाकिर अली और मधु गुप्ता के भी मंत्री बनने की संभावना है लेकिन मंत्रीमंडल के विस्तार और गठन ने यह साबित कर दिया है कि अब सोलह महीने बाद अखिलेश यूपी की सत्ता पर पूरी तरह काबिज हो गए है। वैसे अखिलेश पर राजा भैय्या को लेकर दबाव बहुत था लेकिन सूत्र बताते है कि अखिलेश इस बार किसी बात पर भी झुकने के लिए तैयार नहीं थे।
बिधूना के विधायक और रिश्ते में अपने मामा को अनुशासनहीनता पर सपा से बाहर का रास्ता दिखाने वाले अखिलेश अब अपने राजनैतिक फैसले खुद लेने लग गए है और उन्होंने अब अपने ऊपर से हर प्रकार के दबाव (पिता को छोड़कर) को उतार फेंका है। सोलह माह पुरानी अखिलेश यादव सरकार के मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार (फेरबदल) गुरुवार को राजभवन में हुआ। नारद राय, कैलाश यादव, राममूर्ति वर्मा, गायत्री प्रसाद प्रजापति ने शपथ ली। विधान सभा के चार सौ तीन सदस्यों की संख्या के आधार पर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर 60 सदस्य हो सकते हैं। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सरकार में 17 कैबिनेट, पांच स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री और 33 राज्य मंत्री थे। इस लिहाज से मुख्यमंत्री चार नए मंत्री शामिल किए हैं।

भूमिहारों को साधा
बलिया नगर सीट के विधायक नारद राय को मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के पूरे आसार थे। नारद राय भूमिहार समाज से आते हैं और सरकार में इस समाज की नुमाइंदगी नहीं थी। राय मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली पिछली सपा सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को हराकर देवरिया की पथरदेवा सीट से विधान सभा में पहुंचे शाकिर अली का शुमार भी मंत्री पद के संभावित दावेदारों में था। वह पहले भी मंत्री रह चुके हैं। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में उनको मौका नहीं मिला। क्योंकि उन्होंने जीत के बाद स्टेशन पर घोड़ा दौड़ाया था, जिससे सपा सरकार की बड़ी किरकिरी हुई थी। अखिलेश जानते थे कि इस समय यदि उन्हें मंत्री बनाया तो मीडिया पर एक तरफ उनके मंत्रीपद की शपथ की क्लिप चलेगी और दूसरी तरफ उन्हें घोड़ा दौड़ाते दिखाया जाएगा। मीडिया में कानून-व्यवस्था पर सरकार की पहले ही हो रही किरकिरी में अखिलेश इजाफा नहीं करना चाहते थे।
राममूर्ति सिंह वर्मा को मुलायम के संबंधों का फायदा मिला
शाहजहांपुर की ददरौल सीट से विधायक और राज्य मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा 1989 में मुलायम सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं और वह तीन बार लोकसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं। इन्हें भी मंत्रिपद की शपथ दिलाई गई। राममूर्ति सिंह वर्मा को मंत्री बना अखिलेश ने यह जता दिया कि जो उनके पिता के प्रति कभी वफादार रहे है उनकी वह कद्र करते हैं।












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