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जल्द भारत से समझौते के मूड में है चीनी ड्रैगन

[नवीन निगम] चुमार में चीन ने जो घुसपैठ की है उसका अर्थ निकल कर सामने आ गया है। चीन के दो बयान ऐसे है जिनसे यह साफ हो गया है कि वह भारत से बहुत जल्द सीमा समझौता करना चाहता है और इसमें वह अरुणाचल को भी भारत का अंग मान लेने के लिए तैयार हो सकता है। चीन भारत से सीमा समझौता केवल एक शर्त पर करने का उत्सुक है और वह यह है कि भारत उसे व्यापार का रास्ता मुहैया कराए जिसमें दोनों देशों का फायदा है। मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि भारत चीन समझौते का पूरे एशिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और चीन के लिए तिब्बत के इलाके में विदेशी पूंजी निवेश लाने के लिए इससे ज्यादा सफल और कोई नीति नहीं हैं।

क्योंकि सड़क मार्ग से यदि व्यापार होता है तो चीन भारत होकर न केवल अरब सागर तक पहुंच सकेगा। वहीं उसका भारत आने वाला मॉल और सस्ता हो जाएगा। इसके अलावा वह भारत से भी बड़ी संख्या में अनाज और मसाले का आयात कर सकेगा जो उसकी एक बड़ी जरुरत है।अब प्रश्न उठता है कि आखिर चीन भारतीय सीमा में बार-बार क्यों घुस रहा है। इसका सीधा सा जवाब है कि वह देखना चाहता है कि भारत की रक्षा तैयारियां कैसी है और भारत में चीन का मुकाबला करने की इच्छा शक्तिी कितनी मजबूत है। क्योंकि चीन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा लद्दाख के चुमार सेक्टर में की गई ताजा घुसपैठ का बचाव करते हुए कहा है कि उसके सैनिक नियंत्रण रेखा के अपनी ओर गश्त कर रहे थे।

China border

चीन ने साथ ही जोर देकर कहा कि अंतिम समाधान होने तक यथास्थिति में बदलाव नहीं होना चाहिए। चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से जोर देकर कहा कि किसी भी पक्ष को कोई भी ढांचागत विकास नहीं करना चाहिए। हमारी इस बात पर सहमति है कि सीमा मामले का अंतिम समाधान होने तक हममें से किसी को भी (भारत या चीन में) यथास्थिति में बदलाव नहीं करना चाहिए। यानी चीन भारत से कह रहा है कि सीमा पर हम कोई स्थाई निर्माण नहीं करेंगे क्योंकि चीन हमसे बहुत पहले ही सीमा पर निर्माण कर चुका है इसलिए वो हमारे निर्माण को रोकना चाहता है और सीमा विवाद जल्दी हल करने के पीछे भी उसकी यहीं मंशा है कि भारत अपने स्थान पर फिर से काबिज न होने पाए।

एक बात और चीन इस घटना से कुछ हैरत में भी है क्योंकि एक समय जब उसकी सेना भारत के सामने आ गई थी और टकराव तय था तब वह अपनी गलती मानता हुआ पीछे हटा है और यह चीन को भारत का साफ संदेश है कि भारतीय सेना टकराव नहीं चाहती है लेकिन यदि नौबत आई तो वह अपनी जमीन खाली कराने के लिए टकराने के लिए भी तैयार है। भारत की यह एक बड़ी कूटनीतिज्ञ सफलता है कि चीन की सेना को यह एहसास कराना कि भारत कड़ा एक्शन भी ले सकता है।

ज्ञात हो कि 17 जून को भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण और निगरानी कैमरे हटाने के बाद लद्दाख के चुमार इलाके में भारत और चीन की सेना आमने-सामने आ गई थी। ये कैमरे बाद में चीनी सेना ने वापस कर दिए थे। चुमार में भारत के रणनीतिक बढ़त की स्थिति में होने और चीनी पक्ष की तरफ कुछ संवेदनशीलता होने को देखते हुए चीनी गश्ती दल इलाके में घुस आए और भारतीय गश्ती दल के साथ आमना-सामना होने की स्थिति आ गई, इसके बाद चीनी गश्ती दल अपने सामान्य शिविर की ओर लौट गए। चुमार चीन के सैनिकों के लिए हमेशा से असहज स्थिति पैदा करने वाला इलाका रहा है क्योंकि भारत-चीन सीमा के पास यह एक मात्र ऐसी जगह है जहां चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तक पहुंच नहीं है। चीन की तरफ से यह इलाका पहुंच योग्य नहीं है जबकि भारतीय पक्ष का अंतिम बिंदु तक सड़क मार्ग है जिस पर सेना नौ टन तक का भार ले जा सकती है।

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