उत्तराखंड में भारी बारिश, फिर कहर ढहा सकती है गंगा नदी
देहरादून। उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा के बाद चलाया गया बचाव अभियान लगभग समाप्त हो गया है। अब शुरू हुआ है पुनर्वास और राहत कार्य, लेकिन इसमें भी बाधा डालने के लिये तेज बारिश आ गई है। जी हां उत्तराखंड के कई इलाकों में बीती रात से भारी बारिश हो रही है। सबसे ज्यादा बारिश गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में है, जिसकी वजह से गंगा नदी उफान पर आ गई है।
बारिश से हालात न बिगड़ें, इसके लिये राज्य सरकार अपनी पैनी नजर बनाये हुए है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 से 72 घंटों तक भारी बारिश होगी। इस दौरान बादल फटने की भी आशंका व्यक्त की गई है। बारिश जिन इलाकों में सबसे ज्यादा होगी वो हैं- नैनीताल, पिथौरागढ़ और चम्पावत। बारिश के चलते टनकपुर के पास स्थित सिद्ध पीठ पूर्णागिरी माता के मंदिर जाने के कई रास्ते बंद हो गये हैं।
मौसम विभाग ने बद्रीनाथ-केदारनाथ में लगे हुए बचाव दलों को चेतावनी जारी कर दी है कि वो नदी के तटों से दूर ही रहें। खास तौर से बद्रीनाथ, मनेरी, हर्सिल, उत्तरकाशी और जोशीमठ में। इन स्थानों पर भूस्खलन होने की भी आशंका हमेशा बनी रहती है।
ये वो इलाके हैं, जहां पर भारतीय सेना, वायुसेना, पैरा मिलिट्री, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, आदि ने मिलकर संयुक्त अभियान चलाया और हजारों लोगों की जान बचायी। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी भी 3000 से ज्यादा लोग लापता हैं। वहीं गैर सरकारी संगठनों के अनुसार यह संख्या 10 हजार के ऊपर है।

फंसे लोगों की खोज
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा जोशी ने कहा कि 3 हजार लोग लापता हैं और दूर-दराज के इलाकों में फंसे लोगों की खोज का अभियान अभी जारी रहेगा।

गांवों में फंसे लोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूर-दारज के गांवों में फंसे लोगों के लिये खाने-पीने की सामग्री हेलीकॉप्टरों द्वारा पहुंचायी जा रही है।

चेतावनी जारी
मौसम विभाग ने बद्रीनाथ-केदारनाथ में लगे हुए बचाव दलों को चेतावनी जारी कर दी है कि वो नदी के तटों से दूर ही रहें।

बचाव दलों को चेतावनी
मौसम विभाग ने बद्रीनाथ-केदारनाथ में लगे हुए बचाव दलों को चेतावनी जारी कर दी है कि वो नदी के तटों से दूर ही रहें।

गंगा नदी का जलस्तर
उत्तराखंड व अन्य पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के चलते गंगा नदी का जलस्तर मैदानी इलाकों में भी बढ़ गया है। यह तस्वीर इलाहाबाद की है।












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