आपके क्रेडिट कार्ड का भी बन सकता है क्‍लोन

Clone can be made of your Credit Card
लखनऊ (ब्यूरो)। यदि आप क्रेडिट कार्ड होल्‍डर हैं, तो उसके इस्‍तेमाल में जरा भी लापरवाही न करें और किसी भी अंजान व्‍यक्ति को उसकी डीटेल्‍स न बतायें, अन्‍यथा आपके क्रेडिट कार्ड का क्‍लोन बन जायेगा और आपको लग जायेगा लाखों का चूना। ऐसा रैकेट देश में फैल चुका है। हम यहां लखनऊ का एक मामला प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

लखनऊ में बैठे हाईटेक ठगों ने एक हैकर की मदद से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया और उनके खातों से करोड़ों रुपये की खरीदारी कर डाली। कोरिया से हासिल की गई एमएसआर (मैगनेटिक सेंस रीडर) 201 मशीन की बदौलत गिरोह ने विदेशी नागरिकों के क्रेडिट कार्ड के कोड नंबरों को भारतीय क्रेडिट कार्ड पर पेस्ट कर उनके क्लोन तैयार कर लिए थे। इसका राजफाश विकासनगर पुलिस ने वकील बालकृष्ण मिश्र, सॉफ्टवेयर इंजीनियर आशीष सिंह व सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे जयवर्धन शर्मा को गिरफ्तार कर किया है। एसओ विकासनगर अशोक यादव का कहना है कि पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर इन्हें पकड़ा।

गिरोह का संचालन आशियाना सेक्टर जे निवासी वकील बालकृष्ण कर रहा था जबकि मास्टर माइंड मुंबई के एक निजी इंस्टीट्यूट से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी का कोर्स कर चुका आशीष सिंह है। वहीं तीसरा आरोपी ग्राम अलीपुर फतेहपुर निवासी जयवर्धन फतेहपुर के ही एक निजी इंस्टीट्यूट में सिविल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष का छात्र है। इनके पास से पुलिस ने एक लैपटॉप, भारत में प्रतिबंधित एमएसआर 201 मशीन, विभिन्न बैंकों के 25 एटीएम, डेबिट व क्रेडिट कार्ड व अन्य उपकरण बरामद किए हैं। इनके पास से बरामद कार्डो में क्लोनिंग के जरिए विदेशी नागरिकों के क्रेडिट व डेबिट कार्डो का डाटा फीड है।

आरोपितों के लैपटॉप से भी पुलिस को अहम डाटा व साक्ष्य मिले हैं। बताया गया कि गिरोह कुछ लोगों की मदद से विदेशों से और एमएसआर मशीनें मंगवाने की फिराक में था। सीओ के अनुसार क्रेडिट कार्ड के ऊपर दर्ज नंबर को ट्रैक वन जबकि पीछे की ओर मैगनेटिक चिप के भीतर दर्ज 16 डिजिट के नंबर को ट्रैक टू कहते हैं। एमएसआर 201 मशीन की मदद से किसी भी एटीएम अथवा क्रेडिट कार्ड पर ट्रैक वन व ट्रैक टू के नंबरों को रीड व राइट दोनों किया जा सकता है। विदेशी नागरिकों के ट्रैक वन व टू के डाटा को वेबसाइट के जरिए हासिल करने के बाद आशीष उन्हें भारतीय बैंकों के एटीएम व क्रेडिट कार्डो पर पेस्ट कर देता था। बताया गया कि अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्डो से खरीदारी करने के दौरान स्वैप मशीन में ट्रैक वन व ट्रैक टू का डाटा मिलने के बाद किसी पासवर्ड की जरूरत नहीं पड़ती।

आरोपितों से पूछताछ में पता चला है कि मलाड, मुंबई निवासी हैकर महेश की मदद से आशीष विदेशी बैंकों के क्रेडिट कार्डो का डाटा हासिल करता था। गिरोह क्लोन कार्डो का इस्तेमाल राजधानी के अलावा दिल्ली व मुंबई में करता था। गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए मुंबई पुलिस से संपर्क किया गया है। सीओ महानगर राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक मीरागांव, ईस्ट मुंबई निवासी आशीष का संपर्क एक अंतरराष्ट्रीय हैकर से है, जिसकी मदद से आशीष ने तीन अलग-अलग वेबसाइटों से करीब 400 विदेशी नागरिकों के क्रेडिट व डेबिट कार्डो का चोरी किया गया डाटा हासिल किया था। इसके बाद विदेशी नागरिकों के खातों से करोड़ों की खरीदारी, हवाई टिकट की बुकिंग व होटलों के बिलों का भुगतान किया जाता था।

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