आपदा से उत्तराखंड पर्यटन को बारह हजार करोड़ का झटका
नई दिल्ली। उत्तराखंड में आई विनाशकारी बाढ़ एवं भूस्खलन से राज्य के पर्यटन उद्योग को भारी झटका लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योग को इससे उबरने में लम्बा वक्त लगेगा। विनाशकारी आपदा के बाद उन क्षेत्रों के पर्यटकों ने भी अपनी बुकिंग रद्द कर दी है, जहां इस तरह की तबाही नहीं आई है। जुलाई, अगस्त और सितम्बर तक की बुकिंग रद्द हो रही है। एसटीआईसी पर्यटन समूह की निदेशक रिचा गोयल सीकरी ने आईएएनएस से कहा, "बाढ़ का असर मसूरी, नैनीताल, जिम कोर्बेट, देहरादून, लैंसडॉन और कसौनी जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर पड़ा है।"
उन्होंने कहा कि खराब मौसम और सड़कों की दशा को लेकर बढ़ा-चढ़ा कर पेश की जा रही रपटों के कारण यात्री अपनी योजना पर फिर से विचार कर रहे हैं। करीब एक पखवाड़े पहले उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ में सैकड़ों लोग मारे गए, जबकि कई हजार लोगों का सबकुछ बर्बाद हो गया। कुछ लोगों का अनुमान है कि मारे गए लोगों की संख्या कहीं ज्यादा है।
राज्य के अधिकतर इलाकों में अधितर लोगों की जीविका पर्यटन पर निर्भर है और ऐसे में करीब 50 फीसदी बुकिंग रद्द की जा रही है। उद्योग के जानकारों के मुताबिक उत्तराखंड में बुकिंग करा चुके पर्यटक अब दक्षिण भारतीय या दक्षिण-पूर्व एशियाई पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। यात्रा डॉट कॉम के अध्यक्ष शरत धाल ने कहा, "यात्री अपनी योजना बदल रहे हैं। श्रीनगर, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे गंतव्यों की मांग बढ़ रही है।"उन्होंने कहा, "यात्री विदेश और खासकर दक्षिणपूर्व एशियाई गंतव्यों के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।"
एक कारोबारी अध्ययन के मुताबिक इस बाढ़ से पर्यटन उद्योग को 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पर्यटन क्षेत्र में उत्तराखंड का भारतीय राज्यों में आठवां स्थान है। अचानक आई बाढ़ में कई गांव और छोटे शहर बह गए। पूरी की पूरी सड़क समाप्त हो गई। व्यापक स्तर पर बिजली की लाइनें छिन्न-भिन्न हो गईं। तीर्थस्थलों पर भी काफी बुरा असर हुआ है। धार्मिक स्थल केदारनाथ और बद्रीनाथ की तीर्थ यात्रा कई महीने तक प्रभावित रहने का अनुमान है।
उद्योग के जानकारों के मुताबिक यदि सरकार के सभी विभाग पूरे तालमेल से काम करें, तो राज्य अगले पर्यटन सत्र में ही फिर से तैयार हो सकता है। ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जॉर्ज कुट्टी ने कहा, "सरकार का कहना है कि राज्य को सामान्य स्थिति में लौटने में तीन साल लगेंगे, लेकिन बुनियादी संरचना को हुए नुकसान को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह अवधि और लम्बी हो सकती है।"













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