सुप्रीम कोर्ट का आदेश, उत्तराखंड में तेज हो राहत-बचाव कार्य
नयी दिल्ली। उत्तराखंड में भारी बारिश, बादल फटने और बाढ़ की वजह से मची तबाही के बाद वहां मरने वालों की तादात 150 को पार कर चुकी है। हजारों लोग अब भी वहां फंसे हुए है। अलग-अलग राज्यों से आए लोग उत्तराखंड की इस तबाही में फंस गए है।
पांच दिन बीत जाने के बावजूद भी यहां तबाही का सिलसिला खत्म नहीं हुआ है। बद्रीनाथ में अब भी बारिश हो रही है, जिसके कारण राहत बचाव कार्य में भारी दिक्त आ रही है। तबाही के बाद अब भी हजारों लोग दुर्गम इलाकों में फंसे हुए हैं।

पांच दिन बीत जाने के बाद भी 62 हजार लोगों को अभी भी मदद का इंतजार है। उत्तराखंड में फंसे लोगों में देशभर से आए श्रद्धालु शामिल हैं। ऐसे में सबकी नजरें राहत और बचाव अभियान पर है ताकि उनके अपने सलामत बाहर निकाले जा सकें। लेकिन यहां से बचाव-राहत कार्य में शिथिलता की खबरें आ रही हैं।
उत्तराखंड में राहत बचाव कार्य की कार्यशैली और लग रह समय पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। इस मामले में दखल देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी राहत अभियान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को जबाव तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जून तक राज्य और केन्द्र सरकारों को इस बारे में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को राहत और बचाव अभियान तेजी लाने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उत्तराखंड में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए। इसके लिए और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जाए। कोर्ट ने ये भी कहा है कि जो लोग वहां फंसे हुए है उनके खाने-पीने और दवा का इस्तेजाम भी किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि बचाव अभियान में किसी तरह का भेदभाव न किया जाए।












Click it and Unblock the Notifications