जमीनी हकीकत से रूबरू हुए नीतीश
लखनऊ। बिहार में मिली हार ने शायद नीतीश कुमार को जमीनी हकीकत से रूबरू करा दिया हैं। नीतीश ने कहा है कि पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस उपचुनाव में उनकी पार्टी को ज्यादा मत मिले हैं। हमारे सभी कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की थी और सहयोगी पार्टी के लोगों ने भी काफी मेहनत की है। उन्होंने कहा कि हमारा
गठबंधन मजबूत है।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि नीतीश को गठबंधन मजबूत दिखाई पडऩे लगा अभी थोड़े दिनों पहले तक वो मोदी के नाम पर घमासान मचाने और गठबंधन तोडऩे के लिए उतारू थे। बिहार के एक बड़े पत्रकार रहे मेरे मित्र अक्सर कहते रहते थे कि नीतीश बिहार में भाजपा से झगड़ा करके गलत कर रहे हैं। लालू के खिलाफ उनकी जीत का मुख्य आधार संघ का जमीनी स्तर पर काम करने वाला कॉडर और भाजपा का वोटबैंक है जो उन्हें लालू के खिलाफ जीत दिलाता है।

नीतीश को सबक सिखाने के लिए इसी कॉडर ने इस बार काम नहीं किया और नीतीश हार गए। नीतीश मोदी का चाहे जितना विरोध करें भाजपा के साथ रहने के कारण उन्हें मुस्लिम वोट मिलने से रहा और भाजपा के वोटर को भी उन्होंने नाराज कर दिया है जिसके चलते इस बार वो वोट भी नीतीश को नहीं पड़ा। बिहार के महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया में गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल को नसीहत दी और कहा कि एक सीट जीतकर कुछ लोग इतरा रहे हैं, इससे उनके स्वभाव का पता चल जाता है। अधजल गगरी छलकत जाए।
पटना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजद के लोगों को जितना इतराना है इतरा लें। अब इस पर क्या कहिएगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों
को कई बड़ी जीत हासिल हुई है, परंतु हम लोगों ने ऐसा तो कुछ नहीं किया। यह उनके स्वभाव को बताता है।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को महाराजगंज उपचुनाव में राजद की जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा था कि नीतीश के पतन की शुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा था कि सभी जाति-धर्म के लोगों ने प्रभुनाथ को वोट देकर नीतीश की पीठ पर हथौड़ा चला दिया है। गौरतलब है कि महाराजगंज उपचुनाव में राजद ने जदयू प्रत्याशी और राज्य के शिक्षा मंत्री पी़ क़े शाही को 1.37 लाख से ज्यादा मतों से हराया है।












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