नमो-नमो के मंत्र से अमेरिका के स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी में कंपन
अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र नमो-नमो का उच्चारण जब अमेरिका में हुआ तो वहां की सबसे ऊंची मूर्ति स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी तक में कंपन हो गया। यह काल्पनिक कंपन इसलिये हुआ, क्योंकि मोदी ने भारत में उससे भी ऊंची, बलिक दोगुनी ऊंचाई वाली मूर्ति बनवाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि वो भारत में अपनी या किसी नेता की नहीं, बल्कि आज जनमानस की एक मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं, जो हमारी एकता और अखंडता का प्रतीक बने। मोदी ने कहा कि उस मूर्ति की ऊंचाई स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ऊंची होगी। और वह मूर्ति सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित होगी।
मोदी ने अपने भाषण में एक तरफ यूपीए सरकार की नाकामियां गिनायीं तो दूसरी तरफ तर्क देते हुए गूजरात के विकास का मॉडल पेश किया। उन्होंने कहा कि जिस पतंग को लोग 2 रुपए का समझ कर नाली में फेंक देते थे, आज गुजरात में वही पतंग अरबों रुपए का बिजनेस ला रही है। गुजरात के तटीय इलाकों को विकसित किया जा रहा है। अब सिर्फ वापी से मुंबई तक ही विकास नहीं दिखेगा, बल्कि पूरे गुजरात में दिखेगा। उन्होंने कहा कि विकास तब तक विकास नहीं कहलाता जब तक उसकी लहर दूर-दराज के गांवों तक नहीं पहुंच जाये। मोदी के व्याख्यान की हाईलाइट्स।
चीनी घुसपैठ और सैनिकों के सिर कलम किये जाने की घटना को शर्मनाक बताते हुए उन्होंने यूपीए सरकार की बखिया उधेड़ी। उन्होंने कहा कि ये कैसी यूपीए सरकार है कि एक तरफ हमारे सैनिकों के सिर कलम होते हैं तो दूसरी तरफ पड़ोसी देश के मेहमानों के लिये चिकन बिरयानी बनती है। चीन घुसपैठ करती है, तो हमारी सेना को अपनी ही धरती से पीछे हटने के निर्देश दे दिये जाते हैं।
इसके अलावा मोदी ने गुजरात के तमाम विकास मॉडलों की चर्चा करते हुए कहा कि गुजरात आज जो भी है, वो नरेंद्र मोदी की वजह से नहीं, बल्कि 6 करोड़ गुजरातियों की मेहनत की वजह से है।













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