भारत ने दिखाई आंख, परेशान हुआ घमंडी चीनी ड्रैगन
[नवीन निगम] अभी चार दिन पहले तक चीन इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था कि उसने सीमा पर कोई घुसपैठ की है, लेकिन अब वह चीन में भारतीय राजदूत को बुलाकर यह जानकारी हासिल करने में लगा है कि भारत क्या कोई आक्रामक नीति तो नहीं अपनाने जा रहा है। पिछले दिनों हुए घटनाक्रम को देखे तो लगता है कि चीन अब इस मसले को जल्द सुलझाना चाहता है। क्योंकि उसे भारत में अपने व्यापार की चिंता है। बस उसकी मंशा यह है कि मसला हल होते वक्त यह न लगे कि चीन को पीछे हटना पड़ा।
पिछले दिनों चीन और भारत के बीच जिस तरीके से बयानबाजी हुई उसे पढ़कर अब यह साफ हो जाता है कि चीन को यह अनुमान नहीं था कि भारत इस मसले पर इतने कड़े तेवर दिखाएगा। चीन भारत में जनता को विश्वास खो चुकी एक सरकार को ब्लैकमेल करके भारतीय सीमा पर बने बंकर हटवाना चाहता था, लेकिन भारत सरकार और चीन के बीच भारतीय सेना ने जो स्टैंड लिया उसे देखकर ड्रैगन आश्चर्यचकित है। चीन को सपने में भी यह गुमान नहीं था कि भारतीय फौज के आला अफसर इस बार सरकार को इतना कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर देंगे।
भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों और नेताओं के बयान अब यह संकेत दे रहे है कि जो भारत शुरुआत में चीन के आगे झुकता हुआ दिखाई पड़ रहा था अब वो चीन को सख्त लहजे में कुछ समझाना चाहता है। आइये जानते है कि किस प्रकार पिछले दिनों दोनों देशो के बीच बयानबाजी और हुई और इस बयानबाजी से भारत का पक्ष किस तरह मजबूत होता जा रहा है।

भारत मोहम्मद अली की तरह
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने इशारों-इशारों में भारत की तुलना मोहम्मद अली से की। जो अपने प्रतिद्वन्द्वियों को थका देते थे और फिर एक वार से गिरा देते थे। खुर्शीद ने कहा कि भारत का अपना इतिहास रहा है और अगर कोई वार करता है तब देश उसे सहन करने में सक्षम है। इसमें हमें यह जानना चाहिए कि अपना चेहरा किस तरह से बचाएं और मांसपेशी की रक्षा कैसे करें क्योंकि हमें जवाबी वार करना होगा। दक्षिण एशिया में हमें अपने आप को अली के रूप में देखना चाहिए। हमें जानना चाहिए कि हमारे पास शक्ति है, और सामथ्र्य है। (यहां जवाबी वार का मतलब चीन के खिलाफ सख्त कदम से हैं)!

चीन ने माना कि जल्द सुलझा लिया जाएगा मसला
अभी तक अतिक्रमण की बात से मुकरने वाले चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लद्दाख की देपसांग घाटी से अपने सैनिकों को हटाने के सम्बंध में वह कोई निश्चित तिथि नहीं बता सकता। यानी अब वह मान रहा है कि उसने अतिक्रमण किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में नए तनाव को संभवतजल्दी ही बातचीत के जरिये सुलझा लिया जाएगा। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि चीन और भारत इस मुद्दे के पूर्ण और समुचित समाधान के लिए इस पर बातचीत कर रहे हैं।

चीन की असली मंशा सामने आई
चीन के विदेश मंत्रालय से जब यह पूछा गया कि क्या चीन भारतीय सेना द्वारा बंकरों और खंदकों के निर्माण का विरोध करता है, तब चीन की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन की सेना नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करने वाले किसी भी निर्माण का कड़ा विरोध करती है। चीन का मानना है कि सीमा क्षेत्र में शांति और स्थायित्व दोनों पक्षों के हितों का ख्याल रखता है। चीन इस मसले के ज्यादा प्रचार से कितना डरा हुआ है यह इस बयान से साफ हो जाता है कि हुआ चुनयिंग ने कहा कि हमें आशा है कि मीडिया इसे कुछ और समय देगा और थोड़ा धैर्य रखेगा। इस मुद्दे को जल्दी ही बातचीत के जरिये सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष उचित प्रक्रिया के तहत एक दूसरे के साथ संपर्क में हैं और गंभीरता से बातचीत कर रहे हैं और हम एक-दूसरे की स्थिति को और बेहतर समझ रहे हैं। दोनों पक्ष इस मुद्दे को मित्रवत बातचीत के जरिए सुलझाने के इच्छुक और समर्थ हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय भी मुखर हुआ
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत का लक्ष्य लद्दाख के देपसांग में चीनी टुकड़ी को 15 अप्रैल से पूर्व की स्थिति में वापस लौटाना है। उन्होंने कहा कि भारतीय क्षेत्र में 19 किलोमीटर भीतर घुस आए चीनी सैनिकों पर बीजिंग के सामने भारत अपनी चिंता रखने में समर्थ है। उन्होंने जोड़ा कि इस स्थिति के समाधान के लिए दोनों तरफ के चैनल सक्रिय हैं और जल्द ही इसका हल निकल आएगा।

विवाद में अब अमेरिका भी कूदा
अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पैट्रिक वेंट्रेल ने अपने एक बयान में कहा कि हम इस बात का समर्थन करते हैं कि भारत और चीन अपने सीमा संबंधी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर कार्य करें। यानी की चीन ने घुसपैठ की है इस पर अमेरिका को कोई शंका नहीं रह गई है। वेंट्रेल ने भारत के लद्दाख इलाके में चीन की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव को लेकर अमेरिका के नज़रिए के बारे में पूछे गए सवाल का उत्तर देते हुए यह बात कही।

चीन अतिरिक्त भारतीय फौज भेजे जाने से चिंतित
भारत के जवाबी कदमों से निपटने के लिए चीनी विदेश मंत्रालय और सुरक्षा महकमों में गंभीर चर्चा हुई है। चीन के सरकारी मीडिया में भारत को चेतावनी दी गई है कि चीन भारत के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखने को कटिबद्ध है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत की ओर से किसी उकसावे वाली कार्रवाई को चीन नजरअंदाज करेगा। समझा जाता है कि भारतीय राजदूत से भारत द्वारा चीनी घुसपैठ के प्रतिक्रिया स्वरूप उठाए जाने वाले भारतीय कदमों के बारे में सफाई मांगी गई थी। 1 मई को भारत की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में थलसेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह की ओर से चीनी सैनिकों को पीछे जाने को मजबूर करने के लिए कई विकल्पों की भारतीय मीडिया में हुई गहन चर्चा को यहां नोट किया गया है। फ्लैग मीटिंग के बेनतीजा होने के बाद भारत द्वारा देपसांग घाटी में अतिरिक्त फौज भेजे जाने की रिपोर्टों के बाद चीन अब इस मसले पर गंभीर हो गया है।












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