करुणानिधि नाराज, डीएमके ने यूपीए से समर्थन वापस लिया
नई दिल्ली। आखिरकार यूपीए के आलाकमान एम करुणानिधि को मनाने में असफल रहे और डीएमके ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। यूपीए सांसदों के साथ बैठक के बाद एम करुणानिधि ने प्रेसवार्ता में इस बात का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनके 18 सांसद भी सरकार से इस्तीफा देंगे।
डीएमके ने यहअसल में डीएमके यूपीए सरकार पर दबाव बना रही थी कि जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की बैठक में भारत को श्रीलंका के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिये। पहले करुणानिधि ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखा और कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका द्वारा पहले लाए गए प्रस्ताव को मजबूती प्रदान करने के लिए भारत को भी अपना स्वतंत्र प्रस्ताव लाना चाहिए।

डीएमके प्रमुख ने कहा कि तमिलों की आहत एवं जायज भावनाओं की संतुष्टि के लिए बहुत जरूरी है कि भारत यूएनएचआरसी के 22वें सत्र में अमेरिकी प्रस्ताव के समर्थन में मजबूती के साथ खड़ा हो। इससे भी जरूरी यह है कि भारत इस प्रस्ताव को और सख्त बनाने के लिए इसमें जरूरी संशोधनों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करे। लेकिन इस पर सरकार राजी नहीं हुई।
सोमवार को डीएमके ने इस मुद्दे पर समर्थन वापसी की धमकी दी और आज मंगलवार को लंबी बैठक के बाद समर्थन वापस ले लिया।
यूपीए फिर भी सेफ
डीएमके के 18 सांसदों द्वारा समर्थन वापस लिये जाने के बाद भी यूपीए सरकार सुरक्षित है। क्योंकि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल सेक्युलर और 9 निदर्लीय सांसदों का बाहर से समर्थन अभी जारी है।












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