'मामू' के रहते यूपीए का बाल भी बांका नहीं कर सकती डीएमके
डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने श्रीलंकाई तमिल के मुद्दे पर मंगलवार को जब यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापसी का ऐलान किया। ठीक 20 मिनट बाद पी चिदंबरम ने मीडिया से कहा सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। चिदंबरम ने यह बात 'मामू' के दम पर कही। और 'मामू' जब तक साथ हैं, तब तक यूपीए का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।
यहां मामु से तात्पर्य है माया-मुलायम से। जी हां जब तक मायावती और मुलायम सिंह यादव केंद्र के साथ हैं, तब तक डीएमके केंद्र सरकार का बाल भी बांका नहीं कर सकती। समाजवादी पार्टी के कुल 22 सांसद और बसपा के 21 यूपीए के लिये काफी हैं। ऐसे में अगर डीएमके के 18 सांसद साथ छोड़ भी देंगे, तो भी सरकार के पास 281 सांसद हैं और सत्ता में बने रहने के लिये 272 सांसदों की जरूरत पड़ती है।

क्यों साथ हैं माया-मुलायम
सोचने वाली बात यह है कि पहले ममता बनर्जी और अब डीएमके ने सरकार से नाराज होकर समर्थन वापस ले लिया। आखिर ऐसी क्या बात है, जो माया और मुलायम यूपीए का साथ नहीं छोड़ रहे? ऐसी क्या खास बात है जो दोनों संसद के अंदर तो समर्थन देते हैं लेकिन बाहर आकर यूपीए को खरीखोटी सुनाने में जरा भी देर नहीं करते?
इन प्रश्नों के जवाब भी सीधे हैं- मुलायम इसलिये साथ नहीं छोड़ सकते, क्योंकि उन्हें अपने बेटे अखिलेश यादव का करियर बनाना है। जब तक केंद्र के साथ पटती रहेगी, तब तक यूपी के लिये अच्छा बजट मिलता रहेगा। वहीं मायावती के ऊपर ताज कॉरिडोर व अन्य मामलों में सीबीआई जांच चल रही है। अगर केंद्र की आंखें टेढ़ी हो गईं, तो सीबीआई की फाइल खुलने में जरा भी देर नहीं लगेगी।
जबतक मामू चाहेंगे तबतक चलेगी सरकार
वर्तमान में हालात यह बन चुके हैं कि जब तक मामू चाहेंगे, तभी तक केंद्र में यूपीए सरकार जिंदा रहेगी। यह बात मुलायम सिंह खुद जानते हैं, और इसीलिये बीच-बीच में हुंकार भरते रहते हैं। इसीलिये मुलायम बार-बार यह कहते रहते हैं कि जनता तैयार रहे लोकसभा चुनाव कभी भी हो सकते हैं। क्योंकि मुलायम जानते हैं कि वो जब चाहें, सरकार को गिरा सकते हैं। खास बात यह है कि डीएमके के समर्थन वापसी पर अंतिम मुहर लगने के बाद मुलायम की दादागिरी बढ़ जायेगी।












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