बजट सत्र- प्रणब मुखर्जी ने खोले यूपीए के तुरुप के पत्‍ते

नई दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। बजट सत्र शुरू होते ही अपने अभिभाषण में राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यूपीए सरकार के वो तुरुप के पत्‍ते खोले, जिनके बल पर लोकसभा चुनाव में जीत की सीढ़ी बनेगी। राष्‍ट्रपति ने कई अहम प्रस्‍तावों पर प्रकाश डाला, जो अगले एक साल तक यूपीए सरकार के लिये महत्‍वपूर्ण होंगे। इन प्रस्‍तावों में तुरुप के इक्‍के का काम करेगा फूड सिक्‍योरिटी बिल यानी खाद्य सुरक्षा विधेयक।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि खाद्य सुरक्षा विधेयक सरकार के लिये अति महत्‍वपूर्ण है। दूसरा तुरुप का पत्‍ता महंगाई और तीसरा महिला सुरक्षा विधेयक। राष्‍ट्रपति ने कहा कि सरकार का जोर इन दोनों पर इसलिये रहेगा, क्‍योंकि ये दोनों ही देश के लिये सबसे बड़ी चिंता हैं। यौन शोषण के खिलाफ कानून बनाकर जो कदम उठाये हैं, अब उसका पालन भी होना जरूरी है।

अगला फोकस उच्‍चतर शिक्षा मिशन पर होगा। जिस तरह राष्‍ट्रीय साक्षरता मिशन के अंतर्गत देश के कोने-कोने में जाकर लोगों को शिक्षा दिये जाने का काम किया गया, उसी प्रकार अब उच्‍चतर शिक्षा दिये जाने का कार्य किया जायेगा, ताकि हर गांव-गांव, शहर-शहर में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग ग्रजुएट हों। एक और महत्‍वपूर्ण मुद्दा जीडीपी है। अर्थ व्‍यवस्‍था के घाटे को 5.3 फीसदी तक रखने पर जोर दिया, ताकि जीडीपी बढ़ सके।

खैर राष्‍ट्रपति ने तो केंद्र सरकार की तारीफों के पुल बांध दिये, अब देखना यह है कि बजट सत्र में विपक्ष इन मुद्दों पर क्‍या कहता है और देश की जनता कितनी खुश है या खुश होगी, यह तो अगले लोकसभा चुनाव में ही पता चलेगा।

लेफ्ट पार्टियों ने किया विरोध

बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत के वक्‍त राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को जन विरोधी करार देते हुए वाम दलों ने कड़ा विरोध जताया और अभिभाषण का बहिष्‍कार कर दिया। सीताराम येचुरी ने कहा कि राष्‍ट्रपति ने यूपीए की जो उपलब्धियां गिनायीं हैं, उनमें आधी से ज्‍यादा खोखली हैं। जनता यूपीए से पूरी तरह त्रस्‍त है और अगले एक साल उसे और त्रस्‍त करने की नीतियां इन लोगों ने बना दी है।

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