कारगिल खुलासा: मुशर्रफ ने क्रॉस की थी LOC, भारत में गुजारी थी रात

जिस बात को पाक अंतर्राष्ट्रीय जगत में आज तक पाकिस्तान झुठलाता रहा है अब वो ही सारी हकीकत सामने आने लगी है। इस मामले में सनसनीखेज खुलासा पूर्व फौजी कर्नल अशफाक हुसैन ने किया है। उन्होंने अपनी किताब में खुलासा करते हुए लिखा है कि परवेज मुशर्रफ युद्ध से पहले एलओसी सीमा में लगभग ग्यारह किमी तक अंदर आये थे और एक रात गुजारी थी।
हालांकि इन सबके विपरीत लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे परवेज मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध को लेकर अपने उपर लगाये गये आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि मुझे हैरानी हो रही है कि इतना बड़ा अधिकारी ऐसी बात कैसे कह सकता है। मुशर्रफ ने कहा है कि शायद उन्हें सच का नहीं पता, एलओसी का उल्लंघन भारत ने किया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुशर्रफ का असली चेहरा उस वक्त सामने आया जब अशफाक हुसैन की किताब 'विटनेस टू ब्लंडर' के कुछ अंश गुरुवार को पाकिस्तानी टीवी चैनल पर पढ़ कर सुनाए गए। किताब में दावा किया गया है कि 18 दिसंबर 1998 को पहली बार कैप्टन नदीम, कैप्टन अली और हवलदार ललक जान ने एलओसी पार कर रेकी की थी। उसके बाद 28 मार्च 1998 को जनरल परवेज मुशर्रफ हेलिकॉप्टर से एलओसी के पार भारतीय सीमा में 11 किमी तक गए और वहां रात भी गुजारी। इस वक्त उनके साथ कर्नल अमजद शब्बीर भी थे।
किताब में हुसैन ने उस जगह का नाम जकरिया मुस्तकर पोस्ट बताया है जहां मुशर्रफ गये थे और पूरी रात बिताये थे। मालूम हो कि यह किताब वर्ष 2008 में प्रकाशित हुई थी मगर उसके अंदर की सच्चाई आज सामने आई है। गौरतलब है कि कर्नल हुसैन करगिल युद्ध के समय इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टोरेट में नियुक्त थे। हुसैन ने अपनी किताब के जरिए कई और घटनाओं को उजागर किया है। उन्होंने लिखा है कि करगिल युद्ध के बारे में तत्कालीन पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को तब पता चला जब भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फोन पर उनसे जानकारी मांगी। इस किताब में हुसैन ने जहां परवेज मुशर्रफ पर तीखी टिप्पणी की है वहीं उन्होंने इस युद्ध को पूरी तरह से गलत करार दिया है।
उन्होंने लिखा है कि भले ही मुशर्रफ इस युद्ध को अपनी जीत मानते हों लेकिन यह उनकी एक करारी हार थी। जब यह सच्चाई सामने आई तो उन्होंने अपने ही जवानों के शवों को पहचानने से इंकार कर दिया। हुसैन ने इसको मुशर्रफ का घटिया रवैया करार दिया है। उन्होंने लिखा है कि मुशर्रफ और पाक फौज वहां तक पहुंच सकी, क्योंकि उस वक्त भारी बर्फ होने की वजह से भारतीय फौज वहां नहीं थी। मुशर्रफ को उम्मीद थी कि जून तक भारतीय फौज को पाक फौज के वहां होने की जानकारी नहीं मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नतीजतन पाकिस्तान को मुशर्रफ ने एक अनचाहे युद्ध में धकेल दिया।












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