राजनाथ सिंह की ताकत, कमजोरी और चुनौतियां

बड़ी चुनौतियां जिससे राजनाथ सिंह को हर हाल में निपटना होगा
- 2005 से लेकर 2009 तक राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उनके इस कार्यकाल के दौरान भाजपा की राजनीतिक ताकत कमजोर हुई। इतना ही नहीं वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा महज 51 सीटों तक सिमट कर रह गई। 2009 में आम चुनाव में भी भाजपा को जिस सफलता की उम्मीद थी वह नहीं मिल सकी। ऐसे में राजनाथ के सामने भाजपा की राजनीतिक ताकत बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
- ये सब जानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और पार्टी उपाध्यक्ष कलराज मिश्र में बिल्कुल ही नहीं बनती है। जबकि दो दिन पूर्व ही कल्याण सिंह ने एक बार फिर पार्टी में वापसी कर लिया है। ऐसे में इन दोनो दिग्गज नेताओं से अपने रिश्ते ठीक रखने और उन्हें एक साथ लेकर चलना राजनाथ सिंह के लिये कड़ी चुनौती होगी।
- राजनाथ सिंह के सामने पार्टी को एक जूट रखने की चुनौती के साथ ही साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को 2014 की चुनावी जंग के लिये तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। (पढ़ें: कौन हैं राजनाथ सिंह?)
- वहीं कर्नाटक में चल रही पार्टी के नाटक पर विराम लगाना एक अहम चुनौती होगी। येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने के बाद अब कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी को बचाए रखना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
- उनकी सबसे बड़ी चुनौती नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बीच एनडीए के घटक दलों के बीच तालमेल बिठाना होगी। जेडीयू जैसी पार्टी खुलेआम मोदी का विरोध करती है और अक्सर बीजेपी पर खुलकर हमला भी बोलती है।
राजनाथ सिंह की ताकतें
- राजनाथ सिंह की छवि बेहद साफ-सुथरी है। उनके खिलाफ ना तो किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप लगा है और ना ही उनकी राजनीति करियर में कोई दाग है। वो हमेशा से पूरी तरह विवादों से मुक्त रहे हैं।
- राजनाथ सिंह को आरएसएस का वरदहस्त प्राप्त है क्योंकि वो कोई भी फैसला लेने से पहले संघ से सलाह जरुर लेते हैं।
- राजनाथ सिंह खुद को भाजपा की गुटबाजी से हमेशा अलग रखते हैं और यही कारण है कि सभी नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं।
- राजनाथ सिंह अपनी गलतियों के लिये सहयोगियों से माफी मांगने में कभी नहीं हिचकिचाते हैं। सीधे तौर पर कहें तो उनमें अहम की भावना नहीं है जो उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
- राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश से हैं जहां लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटे हैं। इसके अलावा यूपी की जनता राजनाथ सिंह को भलीभांती जानती भी है और पहचानती भी है।
- राजनाथ सिंह के सामने यूपी फतह सबसे अहम चुनौतियों में से है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी है। राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और यहां की राजनीति को भलीभांती जानते है। वो यहां के लोगों से वाकिफ है जिसका अनुभव 2014 में पार्टी के काम आ सकता है।
- राजनाथ सिंह हिंदी भाषा के धनी है और बहुत ही अच्छे वक्ता है। राजनाथ सिंह भाषण देने की कला में पारंगत है जो कि यूपी चुनाव में काम आ सकता है।
- राजनाथ सिंह की जुबान अन्य नेताओं की तरह नहीं फिसलती है। उनके बयान से विवाद नहीं होता। धीर-गंभीर छवि उनके व्यक्तित्व से मेल खाती है। यहीं कारण है कि राजनाथ संघ के बेहद करीबी हैं और भाजपा में सभी बड़े नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं। राजनाथ सिंह राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और इसकी बारीकियों पर ध्यान देते हुए आगे का रास्ता तय करते हैं।
राजनाथ सिंह की कमजोरियां
- भाजपा पदाधिकारियों में राजनाथ सिंह एक ऐसे नेता हैं जिनके खाते में एक भी राष्ट्रीय स्तर का करिश्मा नहीं है। 2005 से लेकर 2009 तक राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और उस समय भाजपा की राजनीतिक ताकत बुरी तरह चरमरा गई थी। वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा महज 51 सीटों तक सिमट कर रह गई थी।
- जानकारों का मनना है कि राजनाथ सिंह सिर्फ ओबीसी वोट बैंक एकत्र कर सकते हैं जो यूपी में तो फायदा पहुंचा सकता है पर अन्य राज्यों में इसका कोई असर नहीं होना।












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