भारतीय युवाओं के दस बड़े टेंशन

बैंगलोर। युवा किसी भी राष्‍ट्र की प्राणवायु और भविष्‍य होते हैं। जो कि देश को आगे ले जाते हैं साथ ही समय-समय पर आमूल चूल परिवर्तन भी करते हैं। अगर राष्‍ट्र विकासशील हो तो इनकी जिम्‍मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे में देश के नेतृत्‍व की यही जिम्‍मेदारी बनती है कि वह अपनी युवा शक्ति के बेहतर इस्‍तेमाल के लिए प्रभावी योजनाएं बनायें और उन पर अमल करे। अभी कुछ समय पहले समाजसेवी अन्‍ना हजारे द्वारा भ्रष्‍टाचार के खिलाफ किये गये आंदोलन में युवाओं ने अपनी सशक्‍त उपस्थिति दर्ज करायी थी।

2011 में की गई जनगणना के अनुसार भारत में लगभग 54 फीसदी युवा आबादी है। यह आबादी चाहे तो मात्र 20 वर्षों में ही देश का भविष्‍य बदल सकती है लेकिन क्‍या कारण है कि पिछले साठ वर्षों से आज भी हम एक विकासशील देश हैं। इसका कारण यही है कि हमारी युवा जनसंख्‍या की शक्ति और उनकी काबिलियत का अब तक सही इस्‍तेमाल नहीं किया गया है। प्रशासन और देश का नेतृत्‍व उन्‍हें वह सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं करा रहा है। जिससे कि वह अपनी योग्‍यता का बेहतर इस्‍तेमाल कर सकें।

हम इन्‍हीं बातों को ध्‍यान में रखकर उन कारणों पर ध्‍यान देंगे जिससे युवाओं में अवसाद या कुंठा की भावना आती है और वह असहाय महसूस करते हैं। यह अवसाद व्‍यावसायिक, ब्‍यक्तिगत और सा‍माजिक कई कारणों से हो सकता है। आईये नजर डालते हैं इन पर-

करियर की टेंशन

करियर की टेंशन

आज के इस आर्थिक युग में धन की प्राथमिकता को झुठलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में युवाओं को एक ऐसे करियर विकल्‍प की तलाश रहती है जो कि उनके सपनों को पूरा करे और उनके जीवन में स्‍थायित्‍व लाये। साथ ही उन्‍हें अपने माता-पिता के सपनों को भी पूरा करना होता है कि उनका बेटा एक दिन बेहद कामयाब इंसान बनेगा।

देश की चिंता

देश की चिंता

बुजुर्गों की नजर में ज्‍यादातर बेपरवाह माने जाने वाले युवाओं में देश के वर्तमान हालातों को देखकर कुंठा घर कर जाती है और वह उससे बचने के लिए बेपरवाह से हो जाते हैं। कई बार तो वह इतने आत्‍मकेंद्रित हो जाते हैं कि उन्‍हें आस पास की खबर ही नही रहती है।

व्‍यक्तिगत रिश्‍तों की चिंता

व्‍यक्तिगत रिश्‍तों की चिंता

बदलते दौर में जहां नैतिक मूल्‍य कम होते जा रहे हैं, ऐसे में वह रिश्‍तों में एक स्‍थायित्‍व पाना चाहते हैं। जब उन्‍हें वह हासिल नहीं होता है तो वह अवसादग्रस्‍त हो जाते हैं। उन्‍हें रिश्‍तों में वह भरोसा नहीं मिलता जिसकी तलाश में वह रिश्‍ते बनाते हैं।

सोशल स्‍टेटस

सोशल स्‍टेटस

यह एक ऐसा कारण होता है कि जो कि उन्‍हें हमेशा आकर्षित करता है। बाजारवाद के इस दौर में युवा एक आकर्षक जीवनशैली की इच्‍छा रखते हैं और चाहते हैं कि उनका जीवन स्‍तर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनें।

रोल मॉडल

रोल मॉडल

आज के परिवेश में युवाओं के आदर्श क्रिकेटर या फिल्‍म सितारें हैं जिनकी जिंदगी सभी के आकर्षण का केंद्र होती है। अत: युवा भी शाहरूख खान और सचिन तेंदुलकर जैसा बनकर दुनिया पर छा जाना चाहते हैं। कई बार कोई समस्‍या आने पर वह फिल्‍म के किरदारों से प्रेरणा लेते हैं वैसी ही प्रतिक्रिया देते हैं।

पुरानी पीढ़ी से सामंजस्‍य बनाना

पुरानी पीढ़ी से सामंजस्‍य बनाना

समय के साथ सोंच, संस्‍कृति और शिक्षा में बदलाव आये हैं,‍ जिससे युवाओं और पुरानी पीढ़ी के लोगों की सोंच में काफी अंतर आया है। युवा जहां परंपरावादी पुरानी पीढ़ी की सोंच से सामंजस्‍य नहीं बिठा पा रहे हैं वहीं पुरानी पीढ़ी के लोग उनकी पश्चिमी सोंच से प्रभावित होने से शिकायत करते हैं।

अनावश्‍यक हस्‍तक्षेप

अनावश्‍यक हस्‍तक्षेप

युवाओं को स्‍वतंत्रता पसंद होती है। वह अपने निर्णय खुद अपनी मर्जी से लेना चाहते हैं और अपने जीवन को अपनी मर्जी से व्‍यतीत करना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई उनकी व्‍यक्तिगत जीवन में हस्‍तक्षेप करता है तो उन्‍हें बुरा लगता है और अगर जब यहीं हस्‍तक्षेप परिवार का कोई ऐसा शख्‍स करता है जो कि उनसे बड़ा होता है तो वह उसे इग्‍नोर भी नहीं कर पाते है टेंशन में आ जाते हैं।

परिवार से लेकर विरोधाभास

परिवार से लेकर विरोधाभास

भारत मे करियर को लेकर आज भी विरोधाभास है। एक एनिमेशन कंपनी में काम करने वाले अमित का कहना है कि मैं इं‍जीनियरिंग करना चाहता था लेकिन पापा चाहते थे कि मैं ग्रेजुएशन पूरी कर किसी गवर्नमेंट जॉब की तैयारी करूं। दोनों में से कुछ न हो सका और अब जो मिला मैं कर रहा हूं।

गर्लफ्रेंड

गर्लफ्रेंड

आजकल ये एक चलन सा बन गया है कि कालेज युवा अगर वो लड़की है तो ब्‍वायफ्रेंड और अगर लड़का है तो गर्लफ्रेंड बनाते हैं। ऐसे में कभी रिश्‍ता टूटने तो कभी दूरियां बढ़ने से टेंशन होती है। कई बार तो यह आपसी प्रतिस्‍पर्द्धा के कारण कॅरियर और पढ़ाई के लिए भी खतरनाक होता है।

स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर तनाव

स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर तनाव

खानपान और कॅरियर के दबाव के बीच युवाओं को एक बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अक्‍सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जिसके परिणाम स्‍वरूप वह कम उम्र में ही किसी न किसी बीमारी का शिकार हो जाते हैं। अत: कई बार युवा अपने स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर भी दबाव में होते हैं।

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