फतवा: रिसेप्शनिस्ट की नौकरी ना करें मुस्लिम लड़कियां

इसपर दारुल उलूम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को ऑफिस में रिसेप्शन पर काम करने गैरकानूनी और इस्लाम के खिलाफ है क्योंकि नियम कहता है कि मुस्लिम महिलाओं को मर्द के सामने बिना बुर्के के नहीं आना चाहिए। इस बीच यूपी इमामा संगठन के अध्यक्ष व मुस्लिम क्लर्क मुफ्ती जुल्फिकार अली ने फतवा को सही बताते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाएं किसी संस्था में बुर्के में काम कर सकती हैं लेकिन रिसेप्शन पर उन्हें सीधे लोगों से मुलाकात करनी होती है इसलिए वह बुर्के में ऐसा नहीं कर सकतीं।
मालूम हो कि इससे पहले देश की प्रमुख इस्लामी संस्था बरेली मरकज ने कहा था कि कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफीशियल इंसेमीनेशन) के जरिए संतान सुख प्राप्त करना और किराए की कोख (सरोगेसी) का सहारा लेना इस्लामी नजरिए से नाजायज है। बरेली मरकज के दारूल इफ्ता ने एक सवाल के जवाब में जो फतवा जारी किया था, उसमें मुसलमानों को कृत्रिम गर्भाधान और किराए की कोख से बचने की सलाह दी गई थी।












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