अखिलेश के राज में तिहाड़ से बढ़कर नारी निकेतन, जहां रेप पीड़िता है बंद

अखिलेश यादव के राज में आलम यह है कि एक रेप पीड़िता से मिलने पर पुलिस ने रोक लगा दी है। जिले के अपर पुलिस अधीक्षक की मानें तो सीओं सिटी द्वारा की जा रही जांच अभी पूरी नहीं हुई। उधर, नारी निकेतन की संचालिका कहना है कि पुलिस ने पीड़िता से मिलने पर रोक लगाए हुए है, इसलिए कोई नहीं मिल सकता।
क्या कहते हैं एसपी साहब
वनइंडिया ने 27 नवंबर की शाम 08:21 बजे फतेहपुर जिले के अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह से लोधीगंज की दलित छात्रा द्वारा दर्ज कराए गए अभियोग मुकदमा अपराध संख्या-567/12, धारा-493, 313, 376, 504, 506 आईपीसी और 3 (1)12 एससी/एसटी एक्ट में नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बारे में पूंछा तो तो उनका कहना था कि पुलिस उपाधीक्षक नगर गौरव सिंह मामले की जांच कर रहे हैं, जांच पूरी होने के बाद ही कुछ किया जा सकता है।
अगर एएसपी की बात सही मानी जाए तो एक सवाल उभर कर सामने आता है कि 20 नवंबर से 25 नवंबर के बीच पीड़िता को महिला थाने में बंद रखने के दौरान सीओ ने पीड़िता और अभियुक्तों के बयानात दर्ज कर कौन सा ड्रामा कर रहे थे? दूसरी बात यह कि सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा-142 में यह प्राविधान किया है कि पुलिस सात साल से नीचे वाली सजा के अपराध में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती, इस मामले में दर्ज धाराओं पर गौर करें तो अभियुक्त को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। फिर अपर पुलिस अधीक्षक का यह बयान किस नियम-कानून की ओर इशारा करता है?
इस मामले में सच यह नहीं है जो पुलिस के अधिकारी कह रहे हैं और कर रहे हैं। सच यह है कि सभी अभियुक्त सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी के करीबी हैं और इसी दल के एक स्थानीय विधायक का पुलिस पर जबर्दस्त दबाव है, जिसके चलते पुलिस ने पहले पीड़िता को महिला थाने में बंद कर समझौते का दबाव बनाया और अब उसे नारी निकेतन में भेज कर मानसिक दबाव बना रही है। इस दौरान पीडि़ता से मिलने में भी रोंक लगा दी गई है।
खूंखार अपराधियों से मिलने पर रोक नहीं तो इस युवती से क्यों
नियम-कानून की बात करें तो जेल में बंद खूंखार अपराधी से भी उसकी स्वीकृति पर उसके परिजन या अन्य मुलाकात कर सकते हैं, मगर नारी निकेतन में तो तिहाड़ जेल से भी ज्यादा कड़ाई है। नारी निकेतन की संचालिका पुष्पा मौर्या का कहना है कि पुलिस ने पीड़िता से मुलाकात में रोक लगा दी है, इसलिए किसी से मुलाकात नहीं कराई जा सकती।
मीडि़या कर्मी या पीड़िता के परिजनों को भले ही उससे न मिलने दिया जा रहा हो, पर कोतवाली में तैनात पुलिस कर्मी शाम-सबेरे उससे मुलाकात कर उसे तमाम तरह के प्रलोभन देकर समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि पीडि़ता का निवास प्रमाण पत्र सदर तहसील कार्यालय से 27 नवंबर को एक पुलिस कर्मी रिसीव करके लाया है, प्राप्तकर्ता में इस सिपाही का हस्ताक्षर बना हुआ है और यह प्रमाण पत्र अब भी इसी पुलिस कर्मी के पास है।
सिर्फ पुलिस वाले ही मिल सकते हैं पीड़िता से
बताया जा रहा है कि इस प्रमाण पत्र के प्राप्त करने वाली रसीद नारी निकेतन की संचालिका पुष्पा मौर्या के पास जमा थी, जो 26 नवंबर की शाम पीड़िता से मुलाकात करने गए दो पुलिस कर्मियों को सौंपी गई है। यह पुलिस कर्मी किस अधिकारी के आदेष पर पीडि़ता से मिले और क्यों मिले, इसका खुलासा करने में नारी निकेतन की संचालिका कतरा रही है।
सूत्र बताते हैं कि नारी निकेतन की संचालिका मुख्य अभियुक्त अजय मौर्या की सगी रिश्तेदार है, अपनी अभिरक्षा में पुष्पा पीड़िता को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। गुलाबी गैंग की नगर कमांडर शैल त्रिपाठी ने बताया कि नारी निकेतन की संचालिका पुष्पा के बेटे की आज शादी है, कल से ही इस घटना का मुख्य अभियुक्त अजय मौर्या और उसके परिजन पुष्पा के घर में मौजूद हैं। पीड़िता पहले ही आरोप लगा चुकी है कि पुलिस उसके दुश्मनों से मिली हुई है और उसकी हत्या करने की योजना बनाई जा रही है।












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