अदालत ने लगा दी छात्रसंघ चुनाव पर रोक

मालूम हो कि पिछले दिनों माया सरकार में छात्रसंघ पर लगी रोक को समाजवादी पार्टी की सरकार ने हटा दिया था। सपा द्वारा छात्रसंघ पर रोक हटाते ही शहर में कई जगहों पर छात्रों के उत्पाद देखे गए और एक छात्र ने एक डिग्री कालेज के अध्यापक को खुलेआम थप्पड़ मारकर साबित कर दिया था कि छात्रसंघ की बहाली के बाद इस प्रकार की घटनाएं होना आम बात होगी।
छात्रसंघ की बहाली के बाद कई संगठनों ने इसका विरोध किया लेकिन सपा की प्रमुख ताकत छात्रों के हित में सरकार का हित देखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने छात्रसंघ चुनाव की तारीख भी तय कर दी। राजधानी में छात्रसंघ चुनाव की तारीख 15 अक्टूबर तय की गयी थी लेकिन उससे पहले ही मामला न्यायालय में पहुंच गया और कोर्ट ने लखनऊ छात्रसंघ चुनाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
न्यायालय द्वारा चुनाव पर रोक लगाए जाने से छात्र काफी निराश हैं और उनका कहना है कि वह इसके लिए सरकार से वार्ता कर मामले का निपटारा करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल सरकार भी अदालत के फैसले के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकती है जिसे देखते हुए सरकार मामले पर विधिक राय ले रही है।












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