एफडीआई मुद्दे पर भाजपा-गडकरी के बिखरे सुर
नई दिल्ली। एक बार फिर से नेताओं के दावे झूठे साबित होते दिखायी पड़ रहे हैं और उन लोगों की बातें सही लग रही हैं जो कहते हैं कि नेताओं की कथनी और करनी में फर्क होता है। भाजपा के रंग-ढंग तो यही दिखाते हैं। जहां एफडीआई निवेश को लेकर उसने एक दिन का भारत बंद बुलाया था वहीं दूसरी ओर उसके राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष गडकरी एफडीआई की वकालत करते दिखायी पड़ रहे हैं।
पार्टी के एक कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि इस वक्त देश में बाहर से निवेश नहीं आ रहा है, साथ ही भारतीय उद्योगपति भी अपनी पूंजी देश के बाहर लगा रहे हैं। ऐसे में, कई क्षेत्रों में एफडीआई की जरूरत है। अगर विदेशी निवेश होगा तो रूपये की कीमत बढ़ेगी और भारत को फायदा होगा।
गडकरी की इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह तो वो ही बात कह रहे हैं जो कि पीएम मनमोहन सिंह कह रहे थे फिर उनमें औऱ पीएम साहब में अंतर क्या रह गया?
तो क्या भाजपा का विरोध एक नाटक था जो वो सरकार के खिलाफ कर रही थी? अब इस बात का असर जनता पर क्या पड़ता है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा लेकिन इतना सच है कि भाजपा और गडकरी दोनों के विचार आपस में मिलते नहीं हैं।
इस मुद्दे पर आप क्या कहते हैं?













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