भाजपा में वापस आ सकते हैं कल्याण सिंह

भाजपा में वापसी के सवाल पर कल्याण सिंह ने हमेशा एक ही उत्तर दिया कि नहीं, नहीं और नहीं लेकिन अब मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुये उनका मन बदल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री के करीबियों का कहना है कि उनके उमा भारती व पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ अच्छे रिश्ते हैं तथा श्री सिंह की पार्टी में वापसी को लेकर उमा भारती महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।
उमा भारती कल्याण सिंह को पिता तुल्य मानती हैं और दोनों लोध जाति का प्रतिनिधत्व करते हैं। उमा भारती तथा भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कल्याण सिंह की पार्टी में वापसी के मुद्दे पर दो बार चर्चा की है दोनों का मानना है कि कल्याण की वापसी पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा पहुंचा सकती है।
कल्याण सिंह की जनक्रांति पार्टी के कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल होने के पक्ष में हैं। जनक्रांति पार्टी के अध्यक्ष और कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। ज्ञात हो कि श्री सिंह ने बुलंदशहर से अशोक प्रधान को टिकट दिये जाने को लेकर 2009 के लोकसभा चुनाव के वक्त पार्टी से दूसरी बार त्यागपत्र दिया था। उनका कहना था कि भाजपा नेतृत्व श्री प्रधान को बुलंदशहर से टिकट न दे क्योंकि उन्होंने विधानसभा के 2007 के चुनाव में डिबाई सीट से उनके पुत्र को हराने में अहम् भूमिका अदा की थी। भाजपा से त्यागपत्र देने के बाद श्री सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष मुलायम सिंह से हाथ मिलाया।
कल्याण सिंह के भाजपा छोडऩे के बाद पार्टी को नुकसान ही हुआ लेकिन सपा भी कल्याण फैक्टर को भुना नहीं पायी। अयोध्या में विवादित ढांचा गिराये जाने के दोषी कल्याण सिंह से हाथ मिलाने के कारण मुस्लिम मतदाता सपा से दूर हो गया।
मोहम्मद आजम खां जैसे नेता ने सपा से त्यागपत्र दे दिया। बाद में मुलायम सिंह यादव ने श्री सिंह से अपने रिश्ते खत्म कर लिये। विधानसभा चुनाव में कल्याण सिंह की जनक्रांति पार्टी को करारी हार मिली। पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। श्री सिंह ने पहली बार 1999 में भाजपा से त्यागपत्र दिया था। उन पर पार्टी विरोधी काम करने तथा अनुशासनहीनता का आरोप लगा था। जानकार मानते हैं कि श्री सिंह के पास भाजपा में वापसी के अलावा अब और कोई रास्ता नहीं बचा है।












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