देश को 'पावर-फुल' बनने से रोकते हैं कुडनकुलम जैसे विरोध प्रदर्शन
इस पर चर्चा करने से पहले मैं आपको ले चलूंगा 2007 में जब इसरो के चेयरमैन के डा. कस्तूरीरंगन लखनऊ विश्वविद्यालय गये थे। तब मैं भी वहीं था, मालवीय सभागार में उनके संबोधन के दौरान मैंने एक सवाल किया- देश के बिजली संकट को कैसे दूर किया जाये? डा. कस्तूरीरंगन ने जवाब दिया- देश के कई राज्यों में भारत सरकार न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करना चाहती है। अगर ये सभी पावर प्लांट स्थापित हो गये और सुचारु रूप से चलने लगे, तो भारत एशिया में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने वाला देश हो जायेगा। उस स्थिति में हर छोटे-बड़े शहरों के साथ-साथ हर गांव-देहात तक बिजली पहुंचेगी। यही नहीं देश बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान तक को बिजली सप्लाई करने में सक्षम होगा।
डा. कस्तूरीरंगन ने जो कहा, वह सच है, लेकिन देश की जनता और राजनीतिक पार्टियां नहीं चाहती हैं कि ऐसा हो। वो नहीं चाहते हैं कि देश तो दूर उनके प्रदेश में भी बिजली 24 घंटे आये और गांव-गांव रौशन हों। तमिलनाडु के कुंडनकुलम गांव में पिछले तीन दिनों से लोगों का प्रदर्शन जारी है। पुलिस की गोलीबारी में एक की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल पर बैठ गये हैं। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन किसी को नहीं पता कि यह प्रदर्शन देश के विकास के आगे एक बड़ी बाधा है। खास बात यह है कि कई राजनीतिक पार्टियां भी नहीं चाहती हैं कि तमिलनाडु में बिजली संकट दूर हो।
कुंडनकुलम में चल रहे प्रदर्शन में बैठे लोगों से जब वनइंडिया तमिल के संवाददाता ने बात की तो, तमाम लोग ऐसे थे, जिन्हें पता तक नहीं कि उनके प्रदर्शन से देश को क्या लाभ होने वाला है और क्या नुकसान। लोग बस यही मानते हैं कि अगर यह न्यूक्लियर पावर प्लांट कुंडनकुलम में स्थापित हो गया तो क्षेत्र के सभी लोगों का जीवन एटम बम पर होगा, जो कभी भी फट सकता है।
ऐसी ही अफवाहें महाराष्ट्र के जैतापुर और हरियाणा के गोरखपुर में फैलाई गई थीं। वहां भी प्रदर्शन हुए और पुलिस की गोलीबारी में कुछ लोग मारे गये।
तमिलनाडु से लेकर उत्तर प्रदेश के हाल
तमिलनाडु से लेकर यूपी तक सभी राज्यों का लगभग एक जैसा हाल है। तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई में रोज़ाना 2 घंटा बिजली कटौती होती है, जबकि ट्यूटीकोरिन, कोयंबटूर, आदि शहरों में 6 से 12 घंटे तक बिजली नहीं आती है। यहां बिजली का वही हाल है जैसा यूपी के पीलीभीत, हरदोई, कानपुर, उन्नाव, आदि शहरों का हाल है।
क्यों जरूरी है न्यूक्लिय प्लांट
तिरुनेवेली जिले में प्रस्तावित इस प्लांट की अगर पहली यूनिट भी बनकर तैयार हो गई तो सीधे 1000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा। खास बात यह है कि अगर यह प्लांट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाये तो यहां से 9200 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा। यानी तमिलनाडु से बिजली संकट लगभग पूरी तरह समाप्त हो जायेगा।
पूरे भारत की बात करें तो पिछले 25 वर्षों में भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट्स का उत्पादन कुल बिजली का 2 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हुआ है, जो कि जनसंख्या को देखते हुए काफी कम है। अगर देश के न्यूक्लिय प्लांट अपनी प्रस्तावित गति से स्थापित होते गये तो वर्ष 2020 में देश में 25 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन सिर्फ इसी से होगा, वहीं उसके अगले 5 वर्षों में उत्पादन बढ़कर 45,000 मेगावॉट होगा।
उस स्थिति में भारत के सभी बिजली स्रोत मिलकर इतनी बिजली पैदा करेंगे, कि हमारा पूरा देश जगमगा उठेगा। यही नहीं हम पड़ोसी देशों को भी बिजली सप्लाई करने में सक्षम होंगे। अभी देश में बिजली बनाने के लिये भारत 478 टन यूरेनियम प्रति वर्ष इस्तेमाल कर रहा है। 2020 तक यह खपत 2000 टन तक बढ़ जायेगी।
कुंडनकुलम से न्यूज अपडेट
कुंडनकुलम में सोमवार को हुए प्रदर्शन में पुलिस की गोलीबारी में जिस मछुवारे की मौत हुई थी, उसके परिवार को सरकार ने 5 लाख का मुआवजा दिया है। मुख्यमंत्री जयाललिता ने लोगों से अपील की है कि वो कुंडनकुलम के खिलाफ लोगों का साथ नहीं दें, क्योंकि इस तरह से राज्य का विकास बाधित होता है।
क्यों शुरू हुआ प्रदर्शन- यह प्रदर्शन इसलिये शुरू हुआ क्योंकि आज मंगलवार को प्लांट में यूरेनियम भरी जानी थी और लोगों के बीच यह अफवाह फैला दी गई कि यूरेनियम से स्थानीय लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। बस फिर क्या था देखते ही देखते हंगामा शुरू हो गया और प्रदर्शन भी। जिसकी वजह से प्लांट के आस-पास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
अब आप सोच सकते होंगे कि राजनीतिक दलों से प्रेरित इस प्रकार के प्रदर्शन किस तरह से देश के विकास में बाधा डालते हैं।













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