राजस्थान में मूसलाधार बारिश, जयपुर समेत कई जगह अलर्ट

राजस्थान के 11 जिलों में 72 घंटे के भीतर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हालांकि पिछले 24 घंटे के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्से में मध्यम स्तर की बारिश हुई है जिसमें उदयपुर में 78 मिमी, धौलपुर 68 मिमी, जयपुर और माउंट आबू में क्रमशः 49.1 मिमी और 23 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। सूत्र बता रहे हैं कि मौसम विभाग ने जयपुर, धौलपुर, भरतपुर, करौली, सीकर, नागौर, टोंक, बांरा, करौली और सवाई माधोपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी है।
बारिश को लेकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल में भी ठन गई है। जहां राज्यपाल ने इस बाबत जिलाधिकारियों से सीधे रिपोर्ट तलब की है। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठककर राहत कार्यों की समीक्षा की। बारिश से अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है।
एक सूत्र ने बताया कि राज्य की कई नदियां और नाले उफान पर हैं जिसमें चंबल सबसे आगे हैं। चंबल खतरे के निशान के पास पहुंच गई है। चंबल नदी के आसपास के 25 गांवों को खाली कराने का आदेश दे दिया गया है। सरकार ने आसपास के सरकारी स्कूलों एवं अन्य भवनों में लोगों को जाने के लिए कहा है क्योंकि इन जगहों पर सरकार ने राहत कैंप लगा रखे हैं। सीकर और जयपुर बारिश से ज्यादा प्रभावित हैं। इसलिए सरकार ने राहत कार्य के लिए यहां सेना को उतार दिया है।
उधर, राजस्थान की राज्यपाल माग्रेट अल्वा ने आश्रय स्थलों पर रह रहे अधिक वर्षा से प्रभावित क्षेत्र के परिवारों के लिए एक संस्था की मदद से खाद्य सामग्री के पांच हजार पैकेट रवाना किए। बताया जा रहा है कि प्रत्येक पैकेट में दस किलो आटा, दाल, चीनी और मसाले हैं। रविवार को राजभवन में इस मौके पर वन एवं पर्यावरण मंत्री बीना काक, जयपुर नगर निगम की महापौर ज्योति खंडेलवाल एवं राजीव बैरी भी मौजूद थे।
राज्यपाल से प्रेरित होकर मुहाना में बारिश प्रभावित लोगों के लिए रुक्मिणी, शारदा और प्रभा ओझा ने आवश्यक खाद्य सामग्री, फल एवं सब्जी बाजार संघ की ओर से आवश्यक खाद्य सामग्री की व्यवस्था की है। हालांकि माना माना जा रहा है कि राज्यपाल अतिवृष्टि में सरकार द्वारा किए जा रहे इंतजाम से संतुष्ट नहीं हैं। उनका सोचना है कि अपनी संवैधानिक मर्यादाओं को नहीं लांघेंगी, लेकिन किसी भी क्षेत्र में आपदा से प्रभावित लोगों से मिलकर सरकार का ध्यान भी आकर्षित करेंगी।
पता चला है कि राज्यपाल जब मौके पर गई तो वहां पीडि़त जनता से यह सुनकर उन्हें अत्यंत कष्ट हुआ कि तब तक प्रशासन की ओर से उनकी कोई सुध नहीं ली गई। उधर, मुख्यमंत्री बाढ़ की आशंका से सभी अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि वे लगातार इसपर नजर बनाए हुए हैं। पर राज्यपाल के कदम को लेकर वे थोड़ा हतोत्साहित दिखे।












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