सत्यमेव- औरत बातें भुला सकती है, थप्पड़ नहीं

देश की हर दूसरी महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती है, यह कहते हुए आमिर ने देश के 50 प्रतिशत पतियों को कठघरे में खड़ा कर दिया, लेकिन उन सास-ससुर, नंद-नंदोई, जेठ-जेठानी, जीजी-जीजा, देवर-देवरानी, बुआ-फूफा, मौसा-मौसी, आदि की बात नहीं की, जो घरेलू हिंसा में मुख्य किरदार निभाते हैं। यूपी के विमेन्स स्टडीज संस्थान के एक सर्वे के अनुसार पति और पत्नी के बीच 60 फीसदी झगड़े घर वालों को लेकर होते हैं। मात्र 10 फीसदी झगड़े ही दोनों के बीच पर्सनल प्रॉब्लम्स को लेकर होते हैं। बाकी के 30 फीसदी झगड़े अन्य मामलों को लेकर होते हैं।
पति द्वारा दी जाने वाली यातनाओं का अंदाजा आपको सत्यमेव का एपिसोड देखकर हो गया होगा, लेकिन क्या होता है जब पति नहीं बल्कि घर का कोई सदस्य औरत पर हाथ उठाता है। ऐसे मामलों में तीन बाते होती हैं- 1. पति की सहमति से कोई पत्नी को पीटे, 2. औरत पर घर का कोई सदस्य हाथ उठाये और पति अपनी पत्नी की रक्षा करे और 3. घर का कोई सदस्य औरत पर हाथ उठाये और पति कुछ न कर सके।
1. पति की सहमति से पत्नी की पिटाई- ऐसे मामले तब होते हैं, जब मां-बाप, भाई-भाभी, बहन-जीजा, आदि पति को औरत के खिलाफ भड़काते रहते हैं। एक समय आता है जब पति उन लोगों के कहने में आकर अपनी पत्नी को पीट देता है, उसमें बाकी के लोग भी उसका साथ देते हैं।
ऐसे में क्या करें- अगर आपको ऐसी यातनाओं से आजादी चाहिये, तो जो लोग आपके पति को आपके खिलाफ भड़का रहे हैं, उनसे सीधी बात करें, अपने पति से बात करें और मामले को सुलझाने के प्रयास करें। फिर भी अगर हाथ उठता है, तो पहली बार में ही विरोध करें। अगर आज आप विरोध नहीं करेंगी, तो कल को पूरा परिवार मिलकर आपकी हत्या तक कर सकता है।
2. औरत पर घर का कोई सदस्य हाथ उठाये और पति अपनी पत्नी की रक्षा करे- ऐसे मामले ज्यादातर तभी होते हैं, जब पति घर पर नहीं होता। घर में झगड़े के दौरान अगर औरत पर कोई हाथ उठा दे, तो पति को तुरंत उसका विरोध करना चाहिये। इससे पति-पत्नी के बीच की डोर मजबूत होती है। ऐसी नौबत नहीं आये, इसके लिए घर में छोटे-छोटे झगड़ों को बढ़ने न दें।
3. घर का कोई सदस्य औरत पर हाथ उठाये और पति कुछ न कर पाये- हमारे देश में बड़ों का आदर करना सिखाया जाता है। तमाम लोग बड़ों का इतना ज्यादा लिहाज़ कर जाते हैं, कि आगे चलकर खुद का जीवन कठिन हो जाता है। जी हां ऐसा ही कुछ होता है जब औरत पर घर में कोई हाथ उठाये और पति कुछ नहीं बोल पाये। किसी भी औरत के लिए इससे बड़ा मानसिक आघात नहीं हो सकता।
क्या होता है ऐसा होने पर- टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में थप्पड़ देखने में जितना आसान होता है, रीयल लाइफ में यह उतना ही कठिन। एक थप्पड़ इंसान को जीवन भर का आघात दे सकता है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पत्नी के मन में जिंदगी भर के लिए यह बैठ जाता है, कि पति ने उसकी रक्षा नहीं की। फिर पति चाहे कितना ही प्यार क्यों न दे, पत्नी को हर पल वही थप्पड़ याद आता है।
आमिर खान ने अपने शो में मर्दों को तमाम उपदेश दिये, मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा- हर घर में झगड़े होते हैं, एक दूसरे को कटु शब्द हर कोई कहता है, एक औरत हर कटु शब्द को भुला सकती है, लेकिन पति या पति के घरवालों द्वारा मारे गये थप्पड़ को मरते दम तक नहीं भुला सकती।












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