लंदन में नीलम होंगे गांधी और कैलनबैक के बीच लिखे पत्र

पत्रों में से एक में गांधी ने 25 मार्च 1945 को कालबाख के बारे में लिखा है, ऐसे वक्त में जब सभी ने मेरा साथ छोड़ दिया था वह अक्सर मुझसे कहा करते थे कि मैं उन्हें हमेशा अपने साथ चलने वाले दोस्त की तरह पाएंगे, अगर जरूरत हुई तो, सच की तलाश में धरती के अंत तक जाएंगे।
सॉथबी ने कहा है कि इस सामग्री में दो पुरुषों के बीच दोस्ती के बारे में काफी जानकारियां हैं। यह गांधी जी की जीवनी के लिए अहम दस्तावेज हैं। कैलनबैक की दक्षिण अफ्रीका में 1904 में गांधी से मुलाकात हुई थी। इसके बाद वे दोनों हमेशा संपर्क में बने रहे।
ज्ञात हो कि गांधी जी के भारत लौटने के बाद भी उनकी दोस्ती कायम रही। 1910 में कैलनबैक ने जोहेनसबर्ग के पास 1100 एकड़ जमीन खरीदी और गांधी जी को दे दी। इस जमीन पर खेती का कामकाज गांधी जी और कैलनबैक मिलकर देखते थे।
सॉथबी ने इस विषय में जानकारी देते हुए बताया कि नीलामी के लिए रखी जाने वाली सामग्री में न केवल जमीन की खरीद से संबंधित दस्तावेज हैं, बल्कि वह दस्तावेज भी शामिल हैं, जो बताते हैं कि कैसे दोनों लोगों ने जमीन के लिए फलों के पेड़ खरीदे। वहां सिंचाई की व्यवस्था की। जमीन पर खेती को लेकर उनका पड़ोसियों से बहस होने का जिक्र भी इनमें है।
इन दस्तावेजों को ध्यान से देखने से पता चलता है कि इसमें गांधीजी के बड़े बेटे हरिलाल, दूसरे पुत्र मणिलाल और तीसरे पुत्र रामदास के बारे में भी जानकारी है। सॉथबी के मुताबिक गांधीजी के पारिवारिक सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों की ओर से लिखे गए इन पत्रों में गांधी की निजी जिंदगी के बारे में विस्तृत जानकारी है।












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