सोनिया का अबतक का सबसे बड़ा सियासी अपमान

आगे की बात करने से पहले पूरे घटनाक्रम की तस्वीर पर चर्चा कर लेते हैं। दरअसल हुआ यह कि ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद पत्रकारों को राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष की पसंद बता दी, एक ही घंटे बाद उस पसंद को खारिज भी कर दिया। मुलायम और ममता ने जैसे ही सोनिया के प्रस्ताव को खारिज किया राजनीतिक गलियारे में हाहाकार मच गया और सब जगह यही चर्चा होने लगी कि यह तो सोनिया गांधी का अपमान है।
अब बात सोनिया से मुलायम और ममता के बदले व राजनीतिक पंडितों की करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मनना है कि ममता प्रणब मुखर्जी को बहुत ज्यादा पसंद नहीं करतीं, लेकिन ममता इसके लिए इस हद तक जाएंगी कि उनकी दावेदारी के बीच दीवार बनकर खड़ी हो जाएंगी ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता था। हैरानी इससे भी है कि अगर ममता को प्रणब वाकई पसंद नहीं थे तो उन्होंने प्रणब को सार्वजनिक रूप से सोनिया की पसंद कैसे बता दिया। क्या वो सोनिया को नीचा दिखाना चाहती थीं? अगर हां तो क्यों? हैरानी भरी बात ये भी है कि मुलायम सिंह इस मुद्दे पर ममता बनर्जी के साथ कैसे आ गए?
सवाल तो यह भी है कि कुछ दिन पूर्व यूपीए सरकार के 3 साल पूरे होने पर आयोजित शाही डिनर में मुलायम की यूपीए से करीबी महज एक दिखावा थी? जानकारों का तो यह भी मानना है कि मुलायम कांग्रेस से खासे आहत हैं। मुलायम इस बात को अबतक नहीं भूले हैं जब उन्होंने अकेले अपने दम पर परमाणु करार के वक्त मनमोहन सरकार को मुंह की खाने से बचाया था। सरकार बचने के बाद कांग्रेस ने मुलायम को हाशिये पर धकेल दिया था।
मुलायम आज यूपी में सबसे बड़ी ताकत हैं लेकिन विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत मिलने से पहले जब वे विरोधी थे तो कांग्रेस ने उन्हें खुद से दूर ही रखा। मुलायम यूपीए पार्ट-2 में सरकार का हिस्सा बनना चाहते थे, लेकिन तब भी कांग्रेस उनसे दूर ही रही और मुलायम मनमोहन सरकार को बाहर से समर्थन देते रहे। आज जब यूपीए सरकार को जिंदा रहने के लिए मुलायम के समर्थन की जरूरत है तो कांग्रेस उनसे पींगे बढ़ा रही है। संभव है कि मुलायम सिंह कांग्रेस के इसी बर्ताव को याद रख उसे सबक सिखाने में ये मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते हों।
जहां तक ममता बनर्जी की बात है तो ममता की कांग्रेस और यूपीए से नाराजगी छिपी नहीं है। ममता गाहे-बगाहे मनमोहन सरकार के लिए मुसीबत पैदा करती रहती हैं। वो काफी समय से बंगाल के लिए खास पैकेज की मांग कर रही हैं लेकिन मनमोहन सरकार इसके लिए राजी नहीं है। ममता ये भी जानती हैं कि कांग्रेस उनसे पीछा छुड़ाकर मुलायम को सरकार में उनका विकल्प बनाना चाहती है। यही वजह है कि ममता ने तुरुप की चाल चलते हुए पहले मुलायम को अपने साथ मिलाया और फिर कांग्रेस और खुद सोनिया पर हमला बोल दिया।












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