दिल्ली में भी बनता है हजार रुपये में फर्जी लाइसेंस

मुनिरका वह अपने एक ग्राहक को फर्जी लाइसेंस देने गया था। जैन ने बताया कि मुखबिर इसके बारे में काफी पहले से सूचना दे रहा था पर पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही था। पर कल उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से दिल्ली, गाजियाबाद और गुड़गांव परिवहन कार्यालय के 25 फर्जी डीएल, दिल्ली परिवहन विभाग की 4 फर्जी आरसी, 2 फर्जी मतदाता पहचान पत्र बरामद हुए है। पूछताछ में उसने बताया कि वह मूल रूप से मेरठ का रहने वाला है। वर्ष 2011 में इस काम को करने लगा। उसने बताया कि पहले वह शालीमार बाग में नरेश की मदद से फर्जी लाइसेंस बनवाता था।
नरेश के जब दुकान बंद कर दिया तो असलम ने खुद ही घर पर कंप्यूटर आपरेटर रखकर उसकी मदद से फर्जी लाइसेंस बनवाना शुरू कर दिया। वह असली आरसी या डीएल को स्कैन करके उस पर फर्जी नंबर व नाम लिखकर कॉपी निकालता था। हालांकि वह यह नहीं बता पाया कि अबतक उसने कितनों को मूर्ख बनाया है पर कयास लगाया जा रहा है कि इन दो सालों में उसने कईयों को मूर्ख बनाया है। उसने बताया कि डीएल के लिए वह एक हजार रुपये लेता था। पहले पांच सौ रुपये एडवांस और पांच सौ रुपये तब जब वह डीएल सौंपता था। उसने बताया कि कईयों को यह बात पता होती थी कि यह नकली है पर कौन चेक करता है के नाम पर लोग इसे ले लेते थे।












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