दिल्ली वालों की प्यास बुझायेगी प्रदूषित यमुना

यूपी में 138 ब्लॉकों में भूजल स्तर सामान्य से नीचे चला गया है। फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी और कूड़े-कचरे से नदियों का जल अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है। इसके निदान के लिए यूरोपीय देशों की तर्ज पर भारत में भी नदियों के जल का प्राकृतिक ढंग से ट्रीटमेंट कर इसे पीने योग्य बनाया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की की ओर से शोध शुरू किया गया है। यूरोपियन कमीशन के सहयोग से शुरू किए गए प्रोजेक्ट का नाम ‘साफ पानी’ रखा गया है। इसके लिए 31 करोड़ रुपये जारी भी हो चुके है।
शोध के लिए दिल्ली में यमुना नदी सहित तीन नदियों और एक झील को चुना गया है। प्रोजेक्ट को अगले तीन साल में पूरा किया जाएगा। इसके लिए नदियों के किनारों पर वाटर टैंक बनाए जाएंगे। इससे नदियों से जल रिसकर टैंकों में भर जाएगा, जो कि प्रदूषण मुक्त होगा। दिल्ली में यमुना का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है। इसलिए जल विज्ञानियों का कहना है कि ऐसे शहरों में वाटर टैंक किनारे से थोड़ा दूर बनाए जाएंगे ताकि रिसाव धीरे-धीरे हो और अधिकतम अशुद्धियां दूर हो जाएं। यह विधि मौजूूदा वाटर ट्रीटमेंट से 80 फीसदी सस्ती होगी। प्रोजेक्ट फिलहाल शुरूआती दौर में हैं। नदियों के किनारे वाटर टैंक बना दिए गए हैं। नतीजे आने में अभी वक्त लगेगा।
योजना के तहत नदियों के किनारों पर वाटर टैंक बनाए जाएंगे। इससे नदियों से जल रिसकर टैंकों में भर जाएगा। इससे नदी के जल में जितना भी प्रदूषण होगा, वह उसके किनारों की मिट्टी पर रुक जाएगा। टैंक में जो पानी जमा होगा वह शुद्ध होगा। गहरे वाटर टैंक में नीचे से आएगा ग्राउंड वाटर। ग्राउंड वाटर और रिसाव से आया पानी मिलकर होगा पीने लायक। नाममात्र की अशुद्धि रही तो मामूली ट्रीटमेंट से हो सकेगा शुद्ध। पानी का नुकसान भी नहीं के बराबर।
प्रोजेक्ट के लिए भारत समेत आठ देशों के 20 संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की भी शामिल है। शोध के लिए दिल्ली में यमुना नदी के अलावा अलकनंदा (श्रीनगर), नैनी झील (नैनीताल) और गंगा (हरिद्वार) प्रोजेक्ट में शामिल हैं। साफ पानी प्रोजेक्ट के तहत रिवर बैंक फिल्ट्रेशन (आरबीएफ) सिस्टम से नदियों के जल को प्राकृतिक ढंग से ट्रीटमेंट दिया जाएगा।












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