सेना में शामिल करने से पहले अग्नि 5 के तीन-चार टेस्ट और होंगे

प्रक्षेपण के बाद रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) प्रमुख वी के सारस्वत ने कहा, "अभियान सफल रहा। मिसाइल ने हिन्द महासागर में अचूक निशाना लगाया। उन्होंने इस सफल परीक्षण को भारतीय मिसाइल कार्यक्रम में मील का पत्थर बताया। प्रक्षेपण के बाद यह आकाश में सीधे उड़ान भरने लगी। उड़ान के दौरान इसका अनेक मापदंडो पर अध्ययन किया गया। दक्षिणी हिंद महासागर में अपने लक्ष्य तक पहुंचने में 15 मिनट का समय लगा।
प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने दी बधाई
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के सफल परीक्षण पर वैज्ञानिकों को बधाई दी। पीएम ने कहा कि यह सुरक्षा तैयारियों की दिशा में भारत के अनुसंधान में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अग्नि पांच का आज का सफल परीक्षण हमारी सुरक्षा, तैयारी और विज्ञान के नये आयाम की खोज में हमारे अनुसंधान की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है।
वहीं एंटनी ने परीक्षण प्रक्षेपण को बड़ी सफलता और महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। एंटनी ने सारस्वत को फोन करके बधाई दी और कहा, "आज राष्ट्र का गौरव और बढ़ गया है। हम उन संभ्रांत देशों के क्लब में शामिल हो गए हैं।
अग्नि 5 से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
- पांच हजार किलोमीटर यानी 3100 मील की मारक क्षमता
- इसे विकसित करने में 4 साल का समय लगा
- इस प्रक्षेपण के बाद भारत ने ग्लोबल इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल क्लब में शामिल होने की दस्तक दे दी है। इस क्लब में अभी तक सिर्फ अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस हैं। इस क्लब में आने के लिए मिसाइल की मारक क्षमता 8000 किलोमीटर होनी चाहिये।
- 1000 किलो तक युद्धक सामग्री को उठा सकती है।
- इसकी लंबाई 17 मीटर, भार 50 टन है।
- अग्नि 5 800 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है।
- इसे बनाने में 800 वैज्ञानिक लगे, समय 3 साल।
- युद्ध के दौरान यह सिर्फ प्रधानमंत्री के निर्देश पर ही दागी जा सकती है।
- इस मिसाइल की कीमत 4860 लाख डॉलर है।












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