अखिलेश को डीपी से परहेज और राजा भैया को मंत्री बनाया

यूपी में कुंडा के गुंडे के नाम से विख्यात राजा भैया वो ही शक्स हैं जिन पर मायावती सरकार में पोटा लगा था और वो और उनके पिता उदय प्रताप सिंह को लंबी जेल की हवा खानी पड़ी थी। राजा भैया के मंत्री बनाये जाने से अखिलेश यादव के उस दावे पर सवालिया निशान लग गये हैं जिसमें अखिलेश ने कहा था कि वो यूपी को बेदाग सरकार देंगे वो दागियों और बहुबलियों को तवज्जो नहीं देंगे।
यह बात उस समय काफी हद तक सही साबित होती भी दिखी जिस समय अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी में आजम खां के कहने के बावजूद डीपी यादव को पार्टी में शामिल नही किया था।
डीपी यादव का भी दागदार चरित्र था, पार्टी में घमासान मचा लेकिन अखिलेश टस के मस ना हुए तो फिर ऐसी कौन सी मजबूरियां रहीं कि टीपू की सेना में राजा भैया शामिल हो गये। राजा भैया के शामिल होने से यह सवाल सबके सामने है कि आखिर उत्तर प्रदेश को कैसे अखिलेश यादव जुर्म मुक्त करेंगे जिनकी सेना में खुद ऐसे लोग मौजूद हैं जिनके ऊपर कानून को तोड़ते हुए कई संगीन आरोप हैं। आखिर किस मजबूरी के तहत डीपी यादव से परहेज करने वाले अखिलेश यादव ने राजा भैया को मंत्री बनाया?
इस पर लोगों का यहां तक कहना है कि अखिलेश यादव ने ऐसा करके अपने दोहरे चरित्र को दर्शाया है। यानी एक तरफ कहते हैं कि मंत्रीमंडल में दागी नेता नहीं रहेंगे, तो दूसरी ओर दागियों को ही शामिल कर रहे हैं। ऐसे में यूपी से किये गये वादे वो कैसे पूरे कर पायेंगे?












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