मर्डर में चलताऊ रूख से भड़की कोर्ट

Murder
दिल्ली (ब्यूरो)। कत्ल के मामले में चलताऊ रुख अपनाने पर कोर्ट ने पांच पुलिस अफसरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि हत्या जैसे मामलों में ठीक से जांच नहीं की गई। कोर्ट ने तत्कालीन डीसीपी, एसीपी, एसएचओ, दो इंस्पेक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

तीस हजारी स्थित अदालत ने हत्या जैसे जघन्य मामले की जांच में लापरवाही बरतने वाले कोर्ट ने मामले में अभियोजन पक्ष की नाकामी को देखते हुए सरकारी वकीलों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने को भी कहा हैं। तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र एस. राठी की अदालत ने एक अहम फैसले में कहा कि हत्या के मामले की जांच के दौरान आरोपियों के पते की पड़ताल नहीं की गई, जबकि ऐसे मामले में एसीपी और डीसीपी स्तर तक के अधिकारियों की नजर होती है।

आरोप-पत्र दाखिल करते समय पते की जांच नहीं करने के चलते ही चार में से दो आरोपी कानून की पकड़ से दूर हैं। इस लापरवाही में अदालत ने मध्य जिले के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त आलोक कुमार, एसीपी वीनू बंसल, नबी करीम थाने के तत्कालीन एसएचओ एच.एस. चौहान के अलावा दो इंस्पेक्टरों सुंदर लाल और जोगिंदर सिंह की गलती पाई है।

इसके बाद अदालत ने उत्तरी परिक्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त को इन अधिकारियों के खिलाफ जांच करके विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील से पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोप-पत्र की पड़ताल करते समय उन्होंने भी इस तथ्य को नजरअंदाज किया। इसके बाद अदालत ने अभियोजन विभाग के निदेशक को आदेश की प्रति भेजी है।

अदालत ने कहा है कि यदि जरूरी हो तो सरकारी वकीलों के लिए ऐसे मामलों की जांच के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ करें। हत्या के मामले में चार आरोपी थे, लेकिन दो आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई, क्योंकि उनका स्थायी पता सही नहीं मिला पाया था। उधर तीस हजारी अदालत ने आगरा जोन के जेल आईजी को व्यक्तिगत तौर पर सोमवार को पेश होने के आदेश दिए हैं।

आगरा जेल सुपरिंटेंडेंट से भी जवाब तलब किया गया है। मऊ के निर्दलीय विधायक मुख्तार अंसारी को कस्टडी पैरोल के आदेश के बावजूद पैरोल नहीं दिए जाने पर यह आदेश जारी किए गए हैं। आदेश नहीं मानने को लेकर दोनों अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की अर्जी दाखिल की गई थी।

तीस हजारी अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन कुमार जैन की अदालत ने आगरा जोन के जेल आईजी बीके गुप्ता को छह फरवरी को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही, आगरा जेल के सुपरिंटेंडेंट बीआर वर्मा से भी मामले में जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों को बताना है कि 30 जनवरी के कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

अंसारी के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अदालत की अवमानना की अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद जेल आईजी को एएसजे सविता राव की अदालत में व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के आदेश दिए गए हैं। 30 जनवरी को तीस हजारी अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने अंसारी को चुनाव प्रचार के लिए 31 जनवरी से नौ फरवरी तक की कस्टडी पैरोल दी थी। आरोपी मऊ और घोसी सीट से विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी है। लिहाजा, इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी के खर्च पर कस्टडी पैरोल के आदेश दिए गए थे। लेकिन अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया। मुख्तार अंसारी के खिलाफ दिल्ली की अदालत में मकोका का मामला चल रहा है। मकोका मामले में नौ फरवरी को पहले से सुनवाई तय है।

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