यूपी में राजनीति दलों का फोकस सिर्फ युवाओं पर

लखनऊ। चुनाव आयोग से लेकर लगभग सभी सियासी दल राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की बातें तो कर रहे हैं लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है यह इसी से जाहिर है कि किसी भी दल ने युवाओं को टिकट देने में विशेष रुचि नहीं दिखायी। प्रदेश के 16वें विधानसभा चुनाव में भी युवा अभी सियासी नजरों में वोटर से ऊपर नहीं उठ पाये हैं।

निर्वाचन आयोग ने एक करोड़ युवा मतदाता बनाये हैं। सभी दल अपने चुनावी एजेंडे से लेकर चुनावी सभाओं में युवाओं को लुभाने के लिए तरह-तरह से वायदे कर रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं को अपनी ओर खींचने के लिए उन्हें राजनीति में आने का प्रलोभन दे रहे हैं। यह दल युवाओं को बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर वोट बैंक तरह इस्तेमाल तो करना चाहते हैं लेकिन प्रत्याशी बनाकर राजनीति में युवाओं की सक्रियता बढ़ाने में हिचक रहे हैं।

प्रमुख राजनीतिक दलों में किसी ने भी 15 प्रतिशत से अधिक युवाओं को टिकट नहीं दिया है। युवाओं को मजबूत वोट बैंक मानकर लुभाने जुटी कांग्रेस, सपा व भाजपा सहित अन्य दलों के चुनावी घोषणापत्रों में युवाओं को रोजगार के अवसरों से लेकर लैपटाप और टैबलेट पीसी जैसे आधुनिक गैजेट्स देने तक के वायदे इस मंशा को जाहिर कर रहे हैं।

कहना गलत नहीं होगा कि हर दल ने अपने चुनाव घोषणापत्र में युवाओं को एक अलग वर्ग के तौर पर माना है। राजनीतिक पार्टियों की नजर में युवाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के मुद्दे सबसे अहम हैं और वे जाति तथा धर्म के आधार पर वोट नहीं देंगे। यह वजह है कि कभी अंग्रेजी और कम्प्यूटर शिक्षा का मुखर विरोध करने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की पार्टी ने इस बार सबको चौंकाते हुए अपने घोषणापत्र में छात्रों को लैपटाप देने का वादा कर डाला।

सपा ने मुसलमान विद्यार्थियों और आधुनिक शिक्षा के प्रति उनकी जरूरतों पर ध्यान देते हुए अपने घोषणापत्र में मदरसों में तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था करने, 10वीं कक्षा पास करने वाली मुस्लिम लड़कियों को आर्थिक मदद तथा उनकी शादी के लिए 30 हजार रुपए देने का वादा किया है। भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में भी युवाओं पर वादों की बारिश की गई है।

इस दल ने पांच साल में एक करोड़ रोजगार सृजित करने, युवा बेरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना के तहत युवाओं को सस्ती ब्याज दर पर एक लाख रुपए तक का कर्ज देने और पात्र युवाओं को दो हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया है। सपा की ही राह चलते हुए भाजपा ने 10वीं पास विद्यार्थियों को एक हजार रुपए में टैबलेट कम्प्यूटर तथा इंटरमीडियट पास करने वाले विद्यार्थियों को पांच हजार रुपए में लैपटाप देने का वादा किया है। भाजपा ने एक शिक्षा आयोग का गठन करने तथा गरीब विद्यार्थियों को इंटरमीडियट तक कापी किताबें, स्कूली वर्दी तथा बैग मुख्त देने का वादा किया है।

साथ ही उसने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने का वादा भी किया है। कांग्रेस ने भी युवाओं को मजबूत वोट बैंक मानकर उस पर खास निगाह रखी है। यही वजह है कि उसने राज्य से प्रतिभा पलायन रोकने के लिए अगले पांच साल में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का एलान किया है।

कांग्रेस ने प्रदेश में पालीटेक्निट प्रणाली में व्यापक बदलाव करते हुए इसमें निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी की शुरूआत की घोषणा की है। हालांकि कांग्रेस ने लैपटाप और टैबलेट पीसी देने का वादा तो नहीं किया है लेकिन अगले दो साल में हर घर में एक मोबाइल फोन पहुंचाने की बात जरूर कही है। इन तमाम चुनावी वायदों में युवा वर्ग खुद को इसलिए भी ठगा महूसस कर रहा है क्योंकि वोट डालने का तो अधिकार उसे हैं लेकिन राजनीति में अपना भविष्य बनाने के लिए उसे अभी भी सियासी दलों की सोच बदलने का इंतजार है।

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