पिछड़ों के बहुमत के लिए उमा-कल्याण आमने-सामने
चरखारी पिछड़ो की सीट कही जाती है। इसलिए बीजेपी ने वहां उमा भारती जो कि खुद पिछड़ी जाति लोध से हैं, को खड़ा किया है लेकिन वहां पर हमेशा से कल्याण सिंह का दबदबा रहा है। कल्याण सिंह खुध लोध समुदाय से हैं। इसलिए ऐसे में खबर है कि कल्याण सिंह उमा भारती के खिलाफ चरखारी सीट से प्रचार कर सकते हैं।
चरखारी विधानसभा क्षेत्र में 38 हजार मतदाता लोधी बिरादरी के हैं और परिसीनम के बाद यह लोधी बहुल सीट हो गई है। हालांकि सभी पार्टियों ने इस सीट पर पिछड़े वर्ग के लोगों को खड़ा किया है। लेकिन मुख्य लड़ाई अब उमा भारती और कल्याण सिंह के बीच में दिख रही है। राठ और चरखारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की मजबूत पकड़ है।
पिछले विधानसभा चुनाव में राठ से उनकी पार्टी के उम्मीदवार ने ही ध्रुवराम चौधरी ही जीते थे। कल्याण सिंह ने बुधवार को फर्रूखाबाद में घोषणा की कि वह चरखारी में उमा के खिलाफ जनसभा करेंगे। उमा ने पिछले दिनों लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि मैं भाजपा में कल्याण का विकल्प नहीं हूं। वह एक बड़े व महान नेता हैं और जो मेरे पिता समाउनका विकल्प नहीं बल्कि उत्तराधिकारी हूं। वो मेरे लिए पिता समान हैं लेकिन कल्याण सिंह के तेवर इस बात को मानते हुए नहीं दिख रहे हैं।













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