कयानी ने किया गिलानी को बयान वापस लेने पर मजबूर

दूसरे से मुखातिब हुए।
रक्षा समिति की बैठक में प्रधानमंत्री गिलानी ने सेना की तरफ नरम रुख दिखाते हुए सरकार और सेना को फौज का हितैशी बताया। उन्होनें कहा कि सरकार और संसद सेना के पीछे मजबूती से खड़ी है। हममे आम सहमती बनी है कि यहां की ज़मीन पर आतंकवाद की इजाजत नहीं दी जाएगी। किसी भी हालत में आतंकवाद का बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
इससे पहले राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मिलकर कयानी ने मांग की जरदारी प्रधानमंत्री से कहे की वह अपना बयान वापस ले। गौरतलब है कि चीनी अखबार पीपल्स डेली को दिए गए बयान में गिलानी ने कहा था कि मेमोगेट कांड को लेकर कयानी और आईएसआई चीफ पाशा के बयान असंवैधानिक हैं। सेना ने इस बयान का पूर्णतया रूप से विराध किया था।
सूत्रों के अनुसार खबर आ रही है कि मेमोगेट का खुलासा करने वाले मंसूर एजाज पाकिस्तान आकर कोर्ट के सामने अपना बयान दर्ज करा सकते हैं। ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' से बातचीत में मेमोगेट कांड का खुलासा करने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक मंसूर एजाज ने धमकी दी थी कि वह पाकिस्तान जाकर सबकी पोल खोल देंगे।
ब्रिटीश अखबार 'द गार्जियन' को एजाज न बताया कि वह पाक जाकर सुप्रीम कोर्ट के सामने सबकी पोल खोलेंगे। एजाज एक अख़बार में लिखे लेख में एक मेमो का खुलासा किया था जिसमें पाक सरकार ने अमेरिका के पूर्व सैन्य प्रमुख माइक मुलेन को पत्र लिखा था। इसके अनुसार सरकार ने लादेन की हत्या के बाद सेना द्वारा तख्तापलट की आशंका के चलते मदद मांगी थी। यह मामला जरदारी के लिए सत्ता रूपी मुसीबत लेकर बाया है। माइक मुलेन तक मेमो पहुंचाने वाले अमेरिका में पाक के पूर्व राजदूत हूसैन हक्कानी के ऊपर भी तलवार लटक रही है।












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