धरनारत किसानों के साथ बैठा फिनलैंड का पर्यावरण आंदोलनकारी

farmer
फतेहाबाद। गांव गोरखपुर में परमाणु संयंत्र लगाने का विरोध में 508 दिनों से लघु सचिवालय के बाहर बैठे किसानों की सुध लेने के लिए सात समन्दर पार से आवाज आई है। धरने पर बैठे किसानों से मिलने के लिए फिनलैंड से एक पर्यावरण आंदोलनकारी मार्को उल्बिटा मंगलवार को फतेहाबाद पहुंचे और किसानों की मांग को जायज बताते हुए उनके आंदोलन को पूरे समर्थन की बात कही।

इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में मार्को ने परमाणु संयंत्र को लोगों के जीवन के लिए खतरनाक बताते हुए इसका इस्तेमाल बंद करने की बात कही। मार्को का कहना था कि परमाणु संयंत्रों से ना केवल इंसानों का बुरा होगा बल्कि आस-पास की जमीन भी खराब हो जाएगी। मार्को ने कहा कि फिनलैंड में भी इस तरह के परमाणु संयंत्रों के खिलाफ आंदोलनों में वे हिस्सा ले रहे हैं।


मार्को ने कहा कि फुकुशिमा की तबाही के बाद जर्मनी, इटली, स्वीडन और स्विजरलैंड जैसे देशों ने अपने यहां चल रहे परमाणु संयंत्रों को बंद कर दिया है और चीन में जो 22 परमाणु संयंत्र लगने थे उसे वहां की सरकार ने रिव्यू करवाने के लिए रोक दिया है। मार्को ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब दुनिया भर के देश अपने परमाणु संयंत्रो को बंद कर रहे हैं, ऐसे में भारत सरकार क्यों देश के किसानों के आंदोलनों का दरकिनार कर परमाणु संयंत्रों को लगवाने के लिए इतनी जल्दबाजी कर रहे हैं।

मार्को से जब पूछा गया कि जनसं या के बढऩे के साथ बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए परमाणु संयंत्रों को लगाने के अलावा विकल्प क्या हैं तो उनका कहना था कि इसके लिए सबसे पहले लोगों को बिजली बचाना सीखना होगा। मार्को ने कहा कि जितनी बिजली एक शॉपिंग माल में होती है उससे करीब 20 गांव को रोशन किया जा सकता
है। इस अवसर पर उनके साथ दिल्ली के रहने वाले रंजीत ठाकुर व आसिद्ध दास भी मौजूद थे।

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