सिरसा में 3000 त्रिशूल बांटकर तोगड़िया देंगे दीक्षा

त्रिशूल दीक्षा ने पैदा किया विवाद
प्रवीण तोगड़िया की त्रिशूल दीक्षा को लेकर विवाद पैदा हो गया है। जिला प्रशासन के मुताबिक बजरंग दल ने त्रिशूल बांटने की इजाजत नहीं ली। एसपी के समक्ष उन्होंने अनुमति लेने के लिए पत्र जरूर भेजा है जिस पर विचार किया जा रहा है। एसपी की ओर से कोई रिपोर्ट आने के बाद ही जिला प्रशासन इस कार्यक्रम पर कोई फैसला लेगा। बताया जा रहा है कि 2100 युवाओं ने अब तक दीक्षा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, बजरंग दल का टारगेट सिरसा में 4 दिसंबर को 3100 युवाओं को त्रिशूल दीक्षा देने का है।
पहले भी हुए हैं त्रिशूल दीक्षा के कार्यक्रम
गौरतलब है कि प्रवीण तोगड़िया ने वर्ष 1998 में राजस्थान से त्रिशूल दीक्षा का कार्यक्रम शुरू किया था तब उन्होंने चार सालों में राजस्थान में 5 हजार तथा गुजरात में 5 हजार त्रिशूल बांटे थे। विश्व हिंदू परिषद के मुताबिक त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम सांकेतिक रूप से एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हिंदुओ को जगाने का काम किया जाता है। परिषद का यह भी दावा है कि त्रिशूल शिव मंदिरों जैसे हैं, लेकिन आकार में छोटे हैं और मानव को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि राजस्थान व गुजरात में जो त्रिशूल बांटे गए थे वे बेहद तेजधार थे मानव जीवन को नुकसान पहुंचाने में सक्षम थे।
राजनीतिक विवाद भी उठा
तोगड़िया का यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से विवादस्पद भी हो गया है क्योंकि हरियाणा एक कांग्रेस शासित राज्य है। जहां इस तरह के कार्यक्रम करना पार्टी की राजनीतिक विचारधारा के विरूद्ध है। राजस्थान में जिस समय तोगडिय़ा ने युवाओं को त्रिशूल बांटे थे उस समय वसुंधरा राजे वहां की सीएम थीं। सिरसा में होने जा रहे इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए है। जिला उपायुक्त डॉ. समीर सरों का कहना है कि त्रिशूल दीक्षा को लेकर प्रशासन ने फिलहाल हरी झंडी नहीं दी है। डीसी कार्यालय कार्यक्रम की इजाजत तभी नहीं देगा जब एसपी कार्यालय इस पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। हम आपको बता दें कि कार्यक्रम 4 दिसंबर को है तथा 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वसं की बरसी भी है।












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