फर्जी राशन कार्ड बनाने में 73 साल की महिला पर जुर्माना

दरअसल, अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध रूप से तीन राशन कार्ड हासिल करने के चलते दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 2007 में मधु विहार स्थित सुरेश राशन स्टोर नाम के इस दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति ने महिला को दो हफ्ते के अंदर 50,000 रुपया अदा करने का निर्देश देते हुए कहा कि एक उचित दर की दुकान, जिस पर से अधिकारियों का भरोसा उठ गया हो उस पर भविष्य में सेवा प्रदान करने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि याची ने स्वयं माना है कि वह सुरेश राशन स्टोर की मालकिन थी और तीन राशन कार्ड उसके, उसके पुत्र और पुत्रवधू के नाम से बना था। यह नहीं माना जा सकता कि यह गलती से हुआ है। अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वह वृद्ध है और उसके सेल्समैन से गलती हुई है। अदालत ने कहा यदि वह वृद्ध है और दूसरों पर निर्भर है तो भी वह लाइसेंस पाने की ही हकदार नहीं है। अदालत ने कहा कि जब सरकार 58 व 60 वर्ष की आयु के बाद के लोगों को सर्विस के लिए फिट नहीं मानती तो फिर 73 वर्षीय रामदुलारी को व्यवसाय के लिए फिट माना जा सकता है। उसने विश्वास खो दिया है और जिस प्रकार गलत नाम से राशन कार्ड बनवाएं गए है वह आपराधिक मामला है।
अदालत ने कहा कि याची ने गलती स्वयं मानी है और भविष्य में ऐसा न करने का तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि राशन की दुकान गरीब लोगों को रियायती दरों पर राशन उपलब्ध करवाने के लिए आवंटित की गई है। इस प्रकार की घपले के कारण महिला को पुन: इस प्रकार की गलती करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अत: 30 नवंबर 2007 को उसका लाइसेंस रद्द करने का निर्णय उचित है।












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