सिर्फ एक लाख जवानों की बदौलत चीन से निपट लेगा भारत!

जबकि तीसरे चरण के तहत भारी मात्रा में जवानों की तैनाती होनी है, जिसमें करीब साठ हजार रूपए खर्च आएगा। यह फैसला इसलिए किया गया है क्योंकि चीन से लगी सीमा पर चीनी सैनिकों का अतिक्रमण अचानक से बढ़ गया है। ऐसा चीन इसलिए कर रहा है क्योंकि भारत, कोरिया के देशों से लगातार मैत्रीपूर्ण संबंध बना रहा है, जबकि चीन लगातार पाकिस्तान के साथ नजर आ रहा है। इसलिए भारत को खतरा महसूस हो रहा है जिसके चलते वो एक साथ एक लाख सैनिकों की तैनाती को मंजूरी दे बैठा।
ऐसा नहीं है कि पूर्वोत्तर सीमा के लिए भारत ही कठिन मेहनत कर रहा है, खबर यह भी है कि चीन ने भी जमकर कमर कस ली है। चीन 4,057 किमी लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर अपनी तरफ के क्षेत्र में करीब दो दशकों से सैन्य व्यवस्थाओं में लगातार इजाफा कर रहा है।
स्टार न्यूज के मुताबिक कि रक्षा मंत्रालय इस बाबत 64 हजार करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी भी दे दी है। इस पैसे से चीन से लगी सीमा पर तैनात करने के लिए भारतीय सेना की चार नई डिविजन बनाई जाएगी। इनमें से दो माउंटेन स्ट्राइक कोर का हिस्सा होंगी, जो विशेष आक्रामक सैन्य अभियान में माहिर होगी। सरकार की योजना लद्दाख और उत्तराखंड में भी एक-एक ब्रिगेड तैनात करने की भी है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि क्या एक लाख सैनिकों की तैनाती से भारत सुरक्षित हो जायेगा। भारत की ओर से हमेशा से शांतिपूर्ण रवैया अपनाया गया है जो अक्सर तो नहीं कई बार भारत के लिए मुश्किल का सबब बना है। इसलिए जानकारों का कहना है कि भारत को ठोस रणनीति के तहत कोई कदम उठाना चाहिए।












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