टीका लगवाने जाएंगे तो आप की आवाज भी रिकार्ड होगी

केंद्र सरकार ने 20 साल पहले पूरे देश में टीकाकरण अभियान शुरू किया था। कुछ समय पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 से 23 माह के बीच के बच्चों का सर्वे करवाया जो काफी चौंकाने वाला है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बीसीजी, पोलियो, डीपीटी और खसरे के टीके मात्र 43.5 फीसदी बच्चों को ही लगवाए जाते हैं। छह टीके में सबसे सफल बीसीजी व पोलियो है जो 78.2 फीसदी बच्चों को लगाए जाते हैं। डीपीटी 55.3 फीसदी और खसरे के टीके 58.8 फीसदी बच्चों को लगाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्य मुख्यालय के बदले जिला मुख्यालय से ही टीकाकरण के आंकड़े भेजने के निर्देश दिए।
साथ ही, टीके लगवाने वाले बच्चे का नाम, पिता का नाम व टेलीफोन नंबर जरूर शामिल करने के लिए कहा। जिन बच्चों के माता पिता के पास टेलीफोन नहीं है वैसे लोगों के आसपास या नजदीकी रिश्तेदारों के टेलीफोन नंबर भेजने की शर्तें रखी गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए टेलीफोन नंबर पर जब संपर्क किया गया जो ज्यादातर नंबर गलत निकले और बच्चों के नाम भी सही नहीं पाए गए। राज्यों को पत्र लिखकर कहा गया है कि सही आंकड़े उपलब्ध कराए जाएं।
मंत्रालय के अधिकारियों की माने तो केंद्र सरकार टीकाकरण में शामिल बच्चे व महिलाओं की आवाज की रिकार्डिंग करवाने की योजना बना रहा है, ताकि फर्जीवाड़ा रोका रोका जा सके। हालांकि वे स्वीकारते हैं कि इसे लागू करने में तमाम परेशानी है। इस सिस्टम को बनाने में काफी खर्ज आएगा। इसे वित्त मंत्रालय से मंजूरी लेनी पड़ेगी। अगर यह सब कुछ तेजी से चला तो भी एक साल लग जाएगा। देखना है सरकार का यह प्रयास कितना कारगर साबित होता है।












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