बेकार ही राहुल गांधी से आस लगा बैठे रालेगन के लोग

सबसे पहले हम बात करते हैं आखिर मामला है क्या- हुआ यूं कि कांग्रेस सांसद पीजे थॉमस कुछ दिन पहले अन्ना के गांव गये, जहां का विकास उन्हें काफी पसंद आया। उन्होंने गांव के सरपंच से कहा कि वो इस गांव के बारे में राहुल गांधी को बतायेंगे और फिर उन्हें दिल्ली बुलायेंगे। इस बीच गांववालों और पीजे थॉमस के बीच निरंतर बातचीत के बाद सोमवार को गांव के सरपंच जयसिंह मापारी, रामदास उगले, संपत राव, सुरेश पाठार, भगवान पाठरे समेत पांच लोग दिल्ली पहुंच गये। यहां पीजे थॉमस से मुलाकात हुई, लेकिन राहुल ने उन्हें समय नहीं दिया।
अब क्या था बात पूरे मीडिया में फैल गई, कि राहुल गांधी ने ग्रामीणों को घर बुलाकर बेइज्जत किया। वैसे सही मायने में देखें तो राहुल गांधी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा होगा, क्योंकि अगर उन्हें गरीबों की इतनी ही चिंता होती तो वो उत्तर प्रदेश के कई गांवों को रालेगन में तब्दील कर चुके होते।
राहुल गांधी यूपी में कदम रखते ही व्यवस्था को लेकर मायावती पर तीर चलाने लगते हैं, लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का क्या, वो तो केंद्र की योजना है। क्या राहुल गांधी ने कभी गोरखपुर, कुशीनगर से लेकर बिहार के गांवों में जाकर उन परिवारों का हाल लिया, जहां जापानी बुखार से अब तक 500 से ज्यादा बच्चे मर चुके हैं। पिछले दिनों पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में हजारों गांव पानी में डूबे रहे, लेकिन राहुल गांधी एक बार भी वहां का दौरा करने नहीं गये। जबकि राहुल गांधी बुंदेलखंड के दलित कुंजीलाल के घर पर रोटी खाने पहुंच गये।
ऐसी तमाम बातें हैं जो राहुल गांधी को पीछे धकेलती हैं, जिसका सीधा असर कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ रहा है। अगर मानवता के तौर पर देखें तो यही कहना उचित रहेगा कि रालेगन के पड़ोसी गांवों के विकास के लिए राहुल गांधी से आस लगाने का कोई मतलब नहीं।












Click it and Unblock the Notifications