अपराधी को क्लीन चिट दे सकती है पुलिस: हाई कोर्ट

पुलिस पर हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद पुलिस प्रशासन की भारी फजीहत हो गयी। न्यायालय का यह कहना कि पुलिस मुठभेड़ के नाम पर केवल अपराधियों को ही नहीं बल्कि निरपराध व्यक्ति का खात्मा कर सकती है यह साबित करता है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तहर से धवस्त हो चुकी है। न्यायालय ने कहा है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने का जिम्मा पुलिस पर है बशर्ते पुलिस कर्मी ईमानदारी व समर्पण के साथ काम करें।
न्यायालय ने कहा कि जब बड़े अधिकारी छोटे पुलिस अधिकारियों के गलत कार्यों पर पर्दा डालने लगे तो कानून व्यवस्था किस प्रकार सही रह सकती है। न्यायालय ने प्रश्न किया कि आखिर पुलिस को कौन सुधारेगा। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने गाजियाबाद के राज प्रकाश की याचिका पर सुनवाई करते हुए गाजियाबाद पुलिस 50 हजार का जुर्माना लगाया। बताया जा रहा है कि श्री प्रकाश की रिवाल्वर व लाइसेंस निवाडी के थाना प्रभारी ओम प्रकाश ङ्क्षसह ने रात में आकर जबरन जब्त कर लिया था तथा फर्जी शिकायत दर्ज कर अपने अवैध कार्य को उचित ठहराने की कोशिश की।
इतना ही नहीं क्षेत्राधिकारी ने पुलिस को बचाने के लिए गलत हलफनामा दाखिल किया और पकड़े जाने पर माफी मांग ली। थाना प्रभारी ने हलफनामा दिया कि याची आठ आपराधिक मामलों में वांछित है जबकि उसे छह मामलों में न्यायालय ने पहले ही बरी कर दिया था। दो मामलों में पुलिस ने अपनी गलती को ढंकने के लिए फर्जी कागजात तैयार किये। पुलिस के इस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद न्यायालय ने गाजियाबाद पुलिस की इस अवैध कारगुजारी की जांच मुख्य सचिव को सौंप दी। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि तीन माह के भीतर जिले की पुलिस की जांच कर दोषी पाये जाने पर विभागीय कार्यवाही कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए। न्यायालय ने याची के विरुद्ध अवैध कार्रवाई के लिए राज्य सरकार पर पचास हजार रुपये हर्जाना लगाया है और कहा है कि सरकार इस रकम को दोषी पुलिस कॢमयों से वसूल सकती है।












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