सावन विशेष : कंगना उड़ायें निदिंया...
दोस्तों,हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह 'श्रृंगार की महत्ता' की लेखिका 'कुमद मेहरोत्रा' ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 7 यानी मेंहदी के बारे में, आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 8 के बारे में,जिसे हम कंगन या चूड़ी कहते हैं। चूड़िया तो मन की चंचलता को दर्शाती हैं तो कंगना मातृत्व की ललक उत्पन्न करता हैं। इसलिए कंगन दुल्हनों का श्रृंगार है जब कि चूंड़ियां कुमारी कन्याएं भी पहनती हैं।
हमारे साहित्यकारों ने भी इस श्रृंगार के बारे में इतना कुछ लिख दिया है जिसके बारे में बात करना बेहद कठिन हैं। वैसे भी जब तक दुल्हन के हाथ में चूड़ियां और कंगन खनकते नहीं हैं तब तक एहसास नहीं होता कि दुल्हन घर आ गयी हैं। बेहद ही खूबसूरत श्रृंगार में शामिल कंगना और चूड़ी केवल महिलाओं को ही नहीं रिझाते बल्कि पुरूषों का भी दिल चुराते हैं। ( कल पढ़े श्रृंगार 9 के बारे में)













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