₹12,000 करोड़ में बना Delhi Dehradun Expressway वे पहली बारिश में ही धंसा! PM मोदी की हुई किरकिरी, Video Viral

Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा कराने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को देश के सबसे आधुनिक हाईवे प्रोजेक्ट्स में गिना गया था। लेकिन उद्घाटन के करीब ढाई महीने बाद ही इस एक्सप्रेसवे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क पर गड्ढे, उखड़ी हुई सतह और खराब सड़क की वजह से वाहनों को नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। इसी के बाद पूरे प्रोजेक्ट की क्वालिटी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर पहली ही बारिश के बाद उभरे गड्ढों का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। सोशल मीडिया पर आम जनता के गुस्से के बाद अब मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के राज में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर हेरफेर हो रहा है, जिसकी वजह से जनता के पैसे से बनी संपत्तियां कुछ ही दिनों में बर्बाद हो रही हैं।

Delhi-Dehradun Expressway

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस ने गुरुवार (02 जुलाई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, उस पर दो महीने के भीतर ही बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। पार्टी ने कहा कि करीब ₹12,000 करोड़ की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की हालत इतनी जल्दी खराब होना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस ने एक्स पोस्ट में लिखा, "लगभग 12,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस एक्सप्रेस-वे पर सिर्फ दो महीने के भीतर ही गहरे गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। यह साफ तौर पर बयां करता है कि इसके निर्माण कार्य में भयंकर धांधली और पैसों का गबन किया गया है।"

पोस्ट में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की गड़बड़ी हुई है। हालांकि पार्टी ने इन आरोपों के समर्थन में कोई जांच रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज साझा नहीं किया।

कांग्रेस ने बात यहीं खत्म नहीं की। पार्टी ने इस मुद्दे को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ते हुए कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कभी पुल टूट रहे हैं, तो कभी सड़कें धंस रही हैं। चाहे हाईवे हों, पानी की टंकियां हों, रेलवे स्टेशन हों या फिर एयरपोर्ट की छतें-आज देश में हर तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर भरभरा कर गिर रहा है। केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए विपक्ष ने यहां तक कह दिया कि यह सरकार देश और जनता दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की वायरल वीडियो की सच्चाई?

इंटरनेट पर सामने आए इस वीडियो में एक शख्स हाईवे की बदहाली को कैमरे में कैद करके दिखा रहा है। वीडियो बनाने वाले बंदे का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसके सामने ही 4 से 5 गाड़ियां अपना संतुलन खो बैठीं। गाड़ियां पलटते-पलटते बची हैं और कई गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है।

इस एक्सप्रेस-वे पर सफर कर रहे ट्रैवलर गाड़ी के ड्राइवर उस्मान ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, "दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे पर बने इन गड्ढों की वजह से मेरी गाड़ी का अलॉय व्हील बुरी तरह टेढ़ा हो चुका है। रास्ते में सिर्फ मेरी ही नहीं, बल्कि दो और गाड़ियों के पहिये इस कदर खराब हुए कि पैसेंजर्स को गाड़ी से नीचे उतरकर खड़ा होना पड़ा।"

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर करके सरकार और ठेकेदारों को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सिर्फ पहली ही बारिश में सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई, जो साफ तौर पर काम में बरती गई लापरवाही की तरफ इशारा करती है।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

वीडियो वायरल होने के बाद एक्स और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने लिखा कि ₹12,000 करोड़ की लागत से बने एक्सप्रेसवे पर पहली ही बारिश में गड्ढे दिखना चिंता की बात है। कुछ लोगों ने इसे निर्माण में लापरवाही बताया, जबकि कई पोस्ट में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि जिस सड़क को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बताया गया था, उसकी सतह इतनी जल्दी कैसे खराब हो गई।

इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन इसी साल 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, और 15 अप्रैल से इसे पूरी तरह आम लोगों की गाड़ियों के लिए खोल दिया गया था। इतने बड़े और महंगे प्रोजेक्ट का तीन महीने के भीतर ही खस्ताहाल हो जाना जनता को रास नहीं आ रहा है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने लिखा कि करोड़ों की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की क्वालिटी देखकर लगता है कि इसमें भारी हेरफेर हुआ है। वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि क्या इसी को हम विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर कहते हैं, जो पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल पाया?

4 फेज में बना है यह पूरा कॉरिडोर

सड़क की खराब क्वालिटी को लेकर छिड़ी इस बहस के बीच, आइए एक नजर डालते हैं इस प्रोजेक्ट के पूरे रूट और इसके अलग-अलग हिस्सों पर:

  • पहला फेज (दिल्ली से शुरुआत): यह 32 किलोमीटर लंबा एक इकोनॉमिक कॉरिडोर है, जो दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर आगे बढ़ता है।
  • दूसरा फेज (ग्रीनफील्ड कॉरिडोर): यह इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसकी लंबाई करीब 118 किलोमीटर है।
  • तीसरा फेज (सुविधाएं): यह हिस्सा 40 किलोमीटर लंबा है, जहां यात्रियों के रुकने और खाने-पीने के इंतजाम किए गए हैं।
  • चौथा फेज (वाइल्डलाइफ कॉरिडोर): यह 12 किलोमीटर लंबा बेहद खास इलाका है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि जंगल के जानवर बिना एक्सप्रेस-वे पर आए, नीचे बने खास रास्तों और पुलों के जरिए आसानी से आ-जा सकें।

213 किलोमीटर का यह प्रोजेक्ट क्यों था इतना खास?

इस पूरे विवाद के बीच अगर इस प्रोजेक्ट के तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं को देखें, तो यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को आपस में जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण रूट है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को इसका उद्घाटन किया था, तब इसे उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के विकास के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया गया था।

  • लागत और चौड़ाई: छह लेन वाले इस पूरे एक्सेस-कंट्रोल इकोनॉमिक कॉरिडोर को बनाने में 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए हैं।
  • दूरी: यह पूरा कॉरिडोर करीब 213 किलोमीटर लंबा है।

इको-फ्रेंडली डिजाइन: इस हाईवे की सबसे बड़ी खासियत इसका वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली होना है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि इंसानों और जंगली जानवरों के बीच होने वाले टकराव को कम किया जा सके और जानवर बिना किसी खतरे के इसके नीचे से आ-जा सकें।

पीएम मोदी ने गिनाए थे ये बड़े फायदे

उद्घाटन के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कॉरिडोर से होने वाले मल्टी-डायमेंशनल (बहुआयामी) फायदों पर बात की थी। उनका कहना था कि यह सड़क सिर्फ दूरी कम नहीं करेगी, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक तकदीर बदल देगी।

पीएम मोदी ने इस प्रोजेक्ट के फायदों को समझाते हुए कहा था कि इस एक्सप्रेस-वे के चालू होने से लोगों का समय तो बचेगा ही, साथ ही सफर का खर्च भी काफी कम हो जाएगा। इससे ईंधन की भारी बचत होगी और माल ढुलाई का किराया भी घटेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि यह केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में व्यापार, नई इंडस्ट्री, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलने जा रही है।

लेकिन अब जब विपक्षी दल ने सड़क की खराब हालत को भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन राजनीतिक आरोपों पर क्या जवाब देती हैं।

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