केतन को आखिर धक्का दिया किसने? सिया या चेतन? ऐसे खुलेगा राज, मर्डर पर इस शख्स के बयान ने खड़े किए सवाल
Ketan Agarwal Death Case:पुणे का केतन अग्रवाल मर्डर केस इस समय पूरे देश में सुर्खियों में है। 20 साल की लड़की सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर जिस बेरहमी से अपने मंगेतर को रास्ते से हटाया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। हर कोई यही सोच रहा है कि अगर सिया यह शादी नहीं करना चाहती थी, तो वह मना भी कर सकती थी। लेकिन उसने मर्डर का रास्ता क्यों चुना?
अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस जहां आरोपी सिया का पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट कराने की तैयारी में है, वहीं देश के मशहूर लेखक चेतन भगत ने इस केस के पीछे छिपी पारिवारिक और सामाजिक सच्चाई पर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है।

सगाई टूटने की बदनामी के डर से रची खौफनाक साजिश
पुलिस की अब तक की पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। पुलिस की टीम ने कोर्ट को बताया कि सिया गोयल अपने मंगेतर केतन अग्रवाल से सगाई तोड़ना नहीं चाहती थी। उसे सबसे बड़ा डर इस बात का था कि अगर उसने खुद शादी से इनकार किया, तो समाज में उसके और उसके परिवार की थू-थू होगी, खानदान की बदनामी हो जाएगी।
इसी सामाजिक प्रतिष्ठा या कहें झूठी शान को बचाने के लिए उसने सगाई तोड़ने के बजाय केतन को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया। उसने इस मर्डर को एक हादसा दिखाने की पूरी तैयारी की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर पहला प्लान फेल हो जाता, तो सिया और उसके प्रेमी चेतन ने इसके लिए 'प्लान बी' और 'प्लान सी' भी तैयार रखा था।
पुलिस ने बताया क्यों जरूरी है पॉलीग्राफ टेस्ट?
कोर्ट में पुलिस ने साफ किया कि मामले के दोनों मुख्य आरोपियों, सिया गोयल और चेतन चौधरी से पूछताछ कर उनके बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। इसके बावजूद इस पेचीदा मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को आपस में जोड़ने और जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाना बेहद जरूरी है।
जांच टीम का मानना है कि इस टेस्ट के जरिए कुछ ऐसे नए और चौंकाने वाले सुराग हाथ लग सकते हैं, जो अब तक सामने नहीं आए हैं। आमतौर पर जिन आपराधिक मामलों में सीधे या पुख्ता सबूतों की कमी होती है, वहां सच्चाई तक पहुंचने के लिए इस वैज्ञानिक तरीके का सहारा लिया जाता है। हालांकि कानूनी तौर पर इस टेस्ट से निकले नतीजों को अदालत के सामने अंतिम और ठोस सबूत के रूप में पेश नहीं किया जा सकता, लेकिन यह जांच का दायरा बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है।

चेतन भगत की थ्योरी:'बिजनेस परिवारों की दकियानूसी सोच ने ली केतन की जान'
इस पूरे मामले पर इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में लेखक चेतन भगत ने एक बेहद अलग और कड़ा नजरिया सामने रखा है। उनके एक लेख 'Why Siya Couldn't Say No to Marriage' को लेकर सोशल मीडिया पर उन पर आरोप लग रहे थे कि वह आरोपी सिया गोयल का बचाव कर रहे हैं। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी का बचाव नहीं कर रहे, दोषी को कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। लेकिन हमें उस जड़ को समझना होगा जहां से यह सोच पैदा होती है।
उन्होंने कहा,
''ऐसे बिजनेस परिवार, जिन्हें मैं SMEs कहता हूं, बहुत ही रूढ़िवादी सोच वाले होते हैं। ये बिजनेस आमतौर पर स्टील पाइप या बॉल बेयरिंग बनाने से जुड़े होते हैं, कोई बहुत हाई-टेक काम नहीं होते। यह एक लेवल पर आकर बस ठहर जाता है। जिसे हम 'लाला कंपनी' कहते हैं। तो फिर जिंदगी में इनका रौब (Flex) क्या होता है? चूंकि ये अमीर होते हैं और खुद को अमीर महसूस कराना चाहते हैं, इसलिए इनका सबसे बड़ा रौब होता है, दिखावे से भरपूर और बेहद खर्चीली शादियां करना। इन बिजनेस परिवारों की दूसरी पीढ़ी के बच्चे अपने माता-पिता का विरोध इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि वे आर्थिक रूप से पूरी तरह उन्हीं पर निर्भर होते हैं। उनके पास करने को सिर्फ एक ही काम होता है, डैडी के बिजनेस की गद्दी पर बैठ जाना। उनका कोई लिंक्डइन प्रोफाइल नहीं होता, न ही उनके पास ऐसी कोई अच्छी कॉलेज डिग्री होती है कि वे नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकें। वे अपनी पूरी लाइफ की फंडिंग के लिए डैडी पर डिपेंड रहते हैं। अब जब कोई आपको फंड करेगा, तो वो आपको कंट्रोल भी करेगा। यही वो समीकरण है जो यहां काम करता है, जो कि बेहद दकियानूसी है।"

चेतन भगत ने बताया सिया गोयल को आखिर क्या करना चाहिए था?
चेतन भगत ने इंटरव्यू में कहा,
"अगर सिया शादी नहीं करना चाहती थी, तो उसके लिए सबसे आसान रास्ता यह था कि वह अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ फैमिली कोर्ट जाती, शादी करती, मैरिज सर्टिफिकेट लेती और अपने माता-पिता को भेज देती। बात वहीं खत्म हो जाती। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसने पुलिस को बताया कि उसने शादी इसलिए नहीं तोड़ी क्योंकि इससे उसके परिवार की बदनामी होती। और यही वह चीज है जो इन बिजनेस परिवारों में देखने को मिलती है। वे काफी दकियानूसी सोच के होते हैं।"
उन्होंने सवाल पूछा,
"क्या आपको लगता है कि मार्क जुकरबर्ग या एलन मस्क अपने बच्चों को इस तरह कंट्रोल करते हैं कि वे किससे शादी कर रहे हैं? सिर्फ एक खुलकर की गई बातचीत इस पूरी समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि उन परिवारों में बच्चों के लिए ऐसा माहौल ही नहीं था।"
केतन अग्रवार मर्डर केस का पूरा मामला?
आपको याद दिला दें कि यह पूरी घटना 18 जून को हुई थी, जब पुणे के एक जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की लोहगढ़ किले की पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई थी। केतन की सगाई सिया गोयल से हुई थी और इसी साल नवंबर में दोनों सात फेरे लेने वाले थे। लेकिन पुलिस जांच में जो सच सामने आया, उसने लव ट्रायंगल और झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के चक्कर में हुए इस मर्डर का भंडाफोड़ कर दिया। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

केतन अग्रवाल हत्याकांड केस से जुड़े लोगों के मन में उठने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: लाई-डिटेक्टर या पॉलीग्राफ टेस्ट क्या होता है और इसकी रिपोर्ट कोर्ट में कितनी मान्य है?
उत्तर: पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान आरोपी से सवाल पूछते समय उसके शरीर में होने वाले बदलावों (जैसे ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और सांस की गति) को मापा जाता है। इससे यह अंदाजा लगाया जाता है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच। भारतीय कानून के मुताबिक, इस टेस्ट की रिपोर्ट को कोर्ट में सीधे तौर पर ठोस सबूत नहीं माना जाता, लेकिन इसके जरिए पुलिस को केस से जुड़े अन्य भौतिक सबूत ढूंढने में मदद मिलती है।
प्रश्न 2: चेतन भगत ने अपने बयान में एलन मस्क और मार्क जुकरबर्ग का जिक्र क्यों किया?
उत्तर: चेतन भगत ने अमीर परिवारों द्वारा बच्चों के फैसलों को कंट्रोल करने की आदत पर तंज कसते हुए यह उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अमीर लोग जैसे जुकरबर्ग या एलन मस्क भी अपने बालिग बच्चों की शादियों और उनके निजी फैसलों को इस तरह कंट्रोल नहीं करते, जैसा हमारे यहां के कुछ रूढ़िवादी बिजनेस परिवारों में देखा जाता है।
प्रश्न 3: क्या आरोपी की मर्जी के बिना लाई-डिटेक्टर टेस्ट किया जा सकता है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी आरोपी की सहमति के बिना उसका पॉलीग्राफ, नार्को या ब्रेन मैपिंग टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसके लिए कोर्ट से मंजूरी लेने के साथ-साथ आरोपी की लिखित सहमति भी जरूरी होती है।













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